जल्द शुरू हो सकता है घाघरा पुल पर वाहनों का आवागमन : डामरीकरण सड़क बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू
Kunwar Diwakar Singh
Mon, Jun 1, 2026
जरवलरोड, बहराइच। लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर जरवलरोड स्थित घाघरा सरयू नदी पर बने संजय सेतु को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले करीब डेढ़ महीने से बड़े पैमाने पर चल रहे मरम्मत कार्य के बाद अब यह पुल अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पुल के ऊपर वाटर प्रूफिंग और कंक्रीट बिछाने के बाद अब तारकोल व डामरीकरण सड़क बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। आधुनिक पेवर मशीनों के जरिए पुल की सतह को तेजी से चमकाया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और निर्माण एजेंसियां दिन-रात मजदूरों की संख्या दुगुनी करके काम पूरा कराने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 90 फीसदी तकनीकी कार्य और बेयरिंग बदलने का काम पूरा किया जा चुका है। विभाग का प्रयास है कि जून के पहले सप्ताह में पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाए। सुरक्षा के मद्देनजर 16 अप्रैल से इस 42 साल पुराने मुख्य पुल पर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया था। हालांकि हल्के वाहनों के लिए अस्थायी रूप से पीपे का पुल बनाया गया था, लेकिन रोडवेज बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को टिकोरा मोड़ से चहलारी घाट, रेउसा और सीतापुर होते हुए एक लंबा चक्कर काटकर लखनऊ या बहराइच की दूरी तय करनी पड़ रही थी। वही गोंडा के लिए फैजाबाद होते हुए भारी वाहनों व बसों को जाना पड़ता था। इस रूट डायवर्जन के कारण चालकों का समय और डीजल का खर्च दोनों काफी बढ़ गया था। घाघरा घाट का यह संजय सेतु केवल लखनऊ और बहराइच ही नहीं बल्कि गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर और नेपाल सीमा से आने-जाने वाले हजारों यात्रियों और व्यापारियों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। इस पुल के शुरू होते ही बहराइच, गोंडा और बाराबंकी के बीच यातायात एक बार फिर सामान्य हो जाएगा और लोगों को रूट डायवर्जन से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि तय समय में कार्य पूरा होने से क्षेत्र के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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