गर्भवती महिलाओं के लिए संजीवनी बनेगा एफसीएम इंजेक्शन : सरकारी प्रसव केंद्रों पर निःशुल्क सुविधा, रक्त चढ़ाने की जरूरत होगी कम
Kunwar Diwakar Singh
Wed, Jul 8, 2026
बहराइच। एनीमिया मुक्त भारत अभियानश् के तहत गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए आधुनिक फेरिक कार्बाेक्सीमाल्टोज़ (एफसीएम) इंजेक्शन की निःशुल्क सुविधा शुरू की गई है। बाजार में अत्यधिक महंगा मिलने वाला यह इंजेक्शन जिले के सभी प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) में उपलब्ध करा दिया गया है। बीते दो माह में 19 गंभीर एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों का उपचार किया जा चुका हैं। यूपी-टीएसयू से डॉ. शालिनी झा ने बताया कि पहले गंभीर एनिमिक गर्भवती को आयरन सुक्रोज के कई डोज के लिए बार-बार अस्पताल आना पड़ता था। अब एफसीएम इंजेक्शन के माध्यम से आवश्यक आयरन की पूरी खुराक एक ही बार में दे दी जाती है, इससे आयरन शरीर के मुख्य अंगों जैसेकृ लीवर, प्लीहा और बोन मैरो में सुरक्षित रूप से स्टोर हो जाता है। इसके बाद, शरीर आवश्यकतानुसार इसी संग्रहित आयरन का उपयोग हीमोग्लोबिन बनाने और नए रक्त के निर्माण में करता है। यही कारण है कि कुछ ही सप्ताह के भीतर हीमोग्लोबिन स्तर में बहुत तेजी से सुधार दिखाई देने लगता है और प्रसव के समय खून चढ़ाने की नौबत ही नहीं आती। हालांकि, उपचार के बाद भी डॉक्टरों की सलाह पर आईएफए, कैल्शियम की गोलियां और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि थोड़े से काम में अत्यधिक थकान, चक्कर आना, बेहोशी, चिड़चिड़ापन, लगातार सुस्ती, मिट्टी या चूना खाने की इच्छा (पाइका), बालों का झड़ना और त्वचा का पीला पड़ना एनीमिया के मुख्य लक्षण हैं। एसीएमओ डॉ. संतोष राना के मुताबिक, गर्भावस्था में खून की कमी से समय से पहले प्रसव, डिलीवरी के वक्त अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) और नवजात का वजन कम होने या उसका मानसिक विकास रुकने का खतरा रहता है। डीएचईआईओ बृजेश सिंह ने बताया कि गर्भावस्था की शुरुआत में ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या वीएचएसएनडी दिवस पर पंजीकरण कराकर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़-चना, चुकंदर और अनार शामिल करें तथा लोहे की कड़ाही में भोजन पकाएं, जिससे शरीर में प्राकृतिक रूप से आयरन की मात्रा बढ़ती है।
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