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: शहीद दिवस पर चन्द्रशेखर आजाद को नमन

सेनानी उत्तराधिकारियों ने चन्द्रशेखर आजाद द्वारा देश की आजादी में किए गए योगदान पर की चर्चा
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद का 93वां शहीद दिवस मनाया गया। सेनानी उत्तराधिकारियों ने चन्द्रशेखर आजाद द्वारा देश की आजादी में किए गए योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था। वो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बदरका गांव के थे। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि उनका असली नाम चन्द्रशेखर तिवारी था लेकिन उन्हें आजाद का उपनाम मिला जिसका अर्थ होता है स्वतन्त्र। उन्होंने संकल्प लिया था वो न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी। समाजसेवी एवं बहराइच विकास मंच के अध्यक्ष हर्षित त्रिपाठी ने कहा कि 24 वर्ष में चन्द्रशेखर आजाद के बलिदान ने देश में क्रांतिकारी माहौल बनाया और हजारों युवा देश की आजादी में अपने योगदान के लिए आगे आए। अन्त में सभी सेनानी उत्तराधिकारियों ने नम आंखों से आजाद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कार्यक्रम समाप्त हुआ। कार्यक्रम में अनिल कुमार उपाध्याय, शैलेन्द्र यादव, विनीत तिवारी, पवन सिंह, राकेश मिश्रा सहित तमाम राष्ट्र भक्त मौजूद रहे।

’’हम गोली बारूद से नही डरेंगे, आजाद हैं, आजाद रहेंगे’’
महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस मनाया गया
बाबागंज, बहराइच। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के 93वें बलिदान दिवस पर अध्यक्ष रामदीन गौतम के संयोजन में ब्लाक मुख्यालय पर स्थापित सेनानी स्मारक पर माल्यार्पण करके देश व समाज में ब्याप्त चुनौतियों तथा भ्रष्टाचार व साम्प्रदायिकता के खिलाफ सामूहिक रूप से प्रतिज्ञा किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से मौजूद कांग्रेस नेता विनय सिंह ने कहा कि 27 फरवरी 1931 को भारत का वीर जांबाज क्रांतिकारियों का रहनुमा जो बिट्रिश साम्राज्य के लिए अत्यंत खौफ बना हुआ था अकेले कई अग्रेजी पुलिसकर्मियों से घिरा होने के बावजूद भी गोली का जबाब गोली से देकर हुंकार भरकर आवाज बुलंद कर रहा था कि हम गोली बारूद से नही डरेंगे, आजाद हैं, आजाद रहेंगे। ब्लाक अध्यक्ष रामदीन गौतम ने कहा कि वतन के जियाले चन्द्रशेखर आजाद 1921 में गांधी जी के असहयोग आन्दोलन में मात्र 14 वर्ष की उम्र में शामिल होकर स्कूली छात्रों को लेकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जुलूस निकाल कर इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेजों भारत छोडो के नारों से आकाश को गुंजा दिया था। संचालन कांग्रेस नेता बद्री सिंह ने किया। उक्त अवसर पर इन्द्र कुमार यादव, राम नरेश यादव, मूलचन्द पासवान, सेवादल के अध्यक्ष बृजेश पाण्डेय, नगर अध्यक्ष रुपईडीहा राजेश गौतम, शाकिर कुरैशी, मोहम्मद आवेश, अजीज अहमद, गुन्ने यादव, जमील अहमद, फकरे आलम, राम सूरत यादव सहित कई लोगों ने अपने अपने विचार ब्यक्त किए।

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