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: समस्याओं का शुचितापूर्ण समाधान हो, अनावश्यक पत्राचार ठीक नहींः जिलाधिकारी मोनिका रानी

बी.एस.परिहार/कुंवर दिवाकर सिंह
बहराइच। मोनिका रानी 20 मई 23 को 78वें जिलाधिकारी के रूप में बहराइच जनपद का बागडोर सम्हाला। इनके वैज्ञानिक चेतना, आधुनिक दृष्ट व गहरे नैतिक विवेक से लैस समाज समरसता के वैभव गाथा को साकार जीवन्त करने में अनुपम उपलब्धियों का विस्तार होता गया। डीएम साहिबा में अभिनव शिल्प कौशल का ही चमत्कार है कि उनके जनकल्याणकारी इतिहास के नवोन्मेष का आभास देता है। इनके विमर्शों समाज व राजनीति के वृहत्तर प्रश्नों से मुठभेड किए बिना सर्व लोकहितकारी प्रंसगों को मानवीय संस्पर्श के साथ रचनात्मकता प्रदान करती है। चाहे देव कोटि हो या मानव समाज को अपने लक्ष्य के उदय के लिए परिस्थति जन्य दुश्वारियों तथा झंझावतों से जूझना पड़ता है। कदाचित अथवा बार-बार उनके स्वप्निल सपने व सोपान के नेपथ्य से पूर्व टूटकर बिखराव होता है। तो ऐसे कतिपय लोग अपनी भाग्य की बदनियति मानकर भविष्य के अन्य भावों पर केन्द्रित हो जाते है। वहीं कुछ अपनी हार में अपराजित को ध्येय बना लेते है। ऐसी ही असीमित उर्जा की धनी मोनिका रानी जी। जिनके इच्छित सोपान सृजनता का समूचा यर्थात क्रम पूरी जीवन्ता के साथ पुनस्सर्जित है। कुशाग्र मोनिका रानी ने अपने दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने प्रारम्भिक हार पर शानदार विजय ध्वज फहराया। इनके बाल्यावस्था की कल्पना ने जटिल जिम्मेदारियों को सकारात्मक निर्वहन के साथ भारत की गौरवशाली पद तक पहुंचाया। मोनिका रानी में बचपन से ही विषम और विपरीत परिस्थितियों को साधने की अकूत क्षमता रही। इनके ठोस सच्चाईयों में नई अर्थवक्ता प्रदान करते है।
मोनिका रानी ने जिस घर में आंखे खोली वहां वैभव के साथ-साथ सरस्वती प्रकात्सवों का उदगम संगम था। आईएएस बनकर देश सेवा करना इनके वाल्यावस्था का सपना था। वक्त तो बदलता गया लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो इनका आईएएस बनने का चट्टान सरीखे स्वप्निल सपना। परिणय सूत्र में बंध गई। स्वावलम्बन के प्रथम पायदान पर शिक्षिका पद पर सेवायोजित हुई। एक पुत्र की मां भी बन गई। ससुराल में धन वैभव की कमी नहीं। पति साफ्वेयर इंजीनियर। पीहर पक्ष ने मोनिका रानी के आईएएस बनने की अभिलाषा को तवज्जों दिया। तैयारियों के साथ यूपीएससी प्रतिस्पर्धा में सम्मिलित हुई। किन्तु भाग्य ने साथ नहीं दिया। अपने धुन की पक्की धनी मोनिका रानी अपने असफलता के कारणों पर गहन मंथन चिंतन कर लक्ष्य पर अटल रही। सास-ससुर, पति की सेवा, पुत्र की वात्सल्यता, सम्पूर्ण गृहणी का धर्म तथा शैक्षिक गुरूजन कर्तव्य निर्वहन करते हुए चैथी बार यूपीएससी परीक्षा में अपेयर हुई। आल इण्डिया में यह 70वीं रैंक प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर आईएएस बन गई। जनमानस की आम धारणा होती है कि हमारा जिलाधिकारी कैसा हो। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितने संघर्ष, पग बांधा को पीछे छोड़ा है। आमजनमानस के जिज्ञासाओं को विराम देने के लिए डीएम मोनिका रानी से विविधि मुद्दों पर उनके निजी जिन्दगी पर सवाल किए गए। डीएम मोनिका रानी ने बड़े ही संजीदगी से जवाब दिया। जिसका संक्षिप्त अंश प्रस्तुतीकरण है। ’’वह पथ और पथिक कुशलता क्या, जिसमें बिखरें तो शूल न हो, नाविक की धैर्य परीक्षा क्या जब धाराएं प्रतिकूल न हो’’ उनके विराट संघर्षशीलता पर फिट बैठती है।
डीएनएः- आप भारतीय प्रशासनिक सेवा में कब आई और बतौर जिलाधिकारी की प्रथम नियुक्ति कहां हुई ?
मोनिका रानीः- तीन बार प्रयासों के बार चैथी बार 2010 में 70वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनी। मेरी प्रथम नियुक्ति बतौर जिलाधिकारी की जनपद चित्रकूट में हुई।
डीएनएः- आप आईएएस में चयनित होने के बाद सबसे पहले इसकी सूचना किसकों दिया?
मोनिका रानीः- अपने पति श्री को।
डीएनएः- आपके मन में आईएएस बनने का ख्याल कब आया और क्यों आया इसके पीछे का कोई खास सबब था?
मेनिका रानीः- बचपन में ही। जन कल्याण की असीमित सम्भावनाएं आईएएस में होती है।
डीएनएः- आपकी शादी कब हुई? आपके पति क्या करते है।
मोनिका रानीः- वर्ष 2005 में शादी हुई। पतिदेव साफ्टवेयर इंजीनियर है।
डीएनएः- आप परिणय सूत्र के बंधन में बंध गई। पुत्र रत्न भी प्राप्त हुआ। एक शिक्षिका की सेवा शुरू किया। आपके समक्ष एक अगाध मातृत्व प्रेम, सास-ससुर, पति की सेवा। एक ग्रहणी के साथ-साथ गुरूजन का दायित्व के उल्कापात में आईएएस की तैयारी इस चतुर्दिक संतुलन साधने में क्या आप कभी विचलित हुई?
मोनिका रानीः- जी नही! निःसंदेह जिम्मेदारिया थी। लेकिन मेरे सपनों को साकार करने में मेरे पीहर पक्ष, पतिश्री ने अपना पूरा सहयोग और हौसला अफजाई किया जिसका सुखद परिणाम सामने है।
डीएनएः- इतनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के मध्य आपको पूर्ण तैयारी करने का समय मिल पाता था?
मोनिका रानीः- जी हां। दायित्वों के निर्वहन के बाद का पूरा समय तैयारी में लगाती। सुबह कब हुई पता नहीं चलता था।
डीएनएः- जब आपका चयन तीन प्रयासों में नहीं हुआ तो आपके पतिश्री अथवा पीहर पक्ष में आपकी तैयारी के प्रति कोई बदलाव आया अथवा आप में पीछे हटने की कोई कल्पना की?
मोनिका रानीः- जी नहीं। पति एवं सास-ससुर ने तीनों हार के बाद सांत्वना दिया और मुझे अच्छे ढंग से तैयारी करने की सलाह दी। समयाभाव नहीं होने दिया। हमने अपने असफलता के कारणों का गहन आत्म मंथन करके हार में जीत खोजती रही। हर हार के बाद मुझमें और अधिक उत्साह तथा उर्जा का शक्तिपात होता रहा। बस यूं समझिए दृढ़ इच्छा शक्ति से मंजिले मिलती है।
डीएनएः- आप अपने प्रशासनिक काम में कितना राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार करती है?
मोनिका रानीः- यह संयोग है कि फिर मेरा सौभाग्य श्रेद्वय योगी जी के शासनकाल में ऐसा कोई राजनीतिक दबाब मेरे ऊपर अनुचित कार्य के लिए नहीं पड़ा। सरकार और शासन की मंशा स्पष्ट है कि बगैर किसी भेदभाव के पारदर्शी, शुचिता के साथ विकास योजनाएं धरातल पर साकार हो। उसका मै मनसा वाचा से प्रयत्न करती हूं। साथ ही चाहे जनप्रतिनिधि हो, चाहे मीडियाकर्मी अथवा सामान्य नागरिक सबके सकारात्मक सुझाओं का अभिनंदन करती हूं।
डीएनएः- आपकों अपनी सेवा काल में अपने कार्य से आत्मसंतृप्ति कब मिली। जो यादगारी बन चुकी हो?
मोनिका रानीः- यू ंतो मुझे मेरे हर कार्य से पूर्ण आत्म संतुष्टि मिलती है। एक घटना डीहा की है। जिसमें तकरीबन 74 अति वृद्धजन अपनी मौलिक समस्याओं को लेकर मेरे समक्ष पेश हुए जिसमें किसी का वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड, आधार कार्ड को लेकर थी। जिसे तत्काल सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों से कहकर पूरा कराया तो उन फरियादी वृद्धजनों के चेहरे के भाव भंगिमा संतृप्त भाव व सजल आंखे मेरी यादगारी बनी।
डीएनएः- शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिकता आप अपने कार्यशैली के पायदान पर रखती है।
मोनिका रानीः- निःसन्देह प्रथम। शिक्षा और स्वास्थ्य हमारे देश की रीढ़ सरीखा है। बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता हमारे नौनिहालों देश के भावी, देश के कर्णधारों नौनिहालो की दिशा तय करती है। चिकित्सा की उपयोगिता को सभी जानते है। विशेषकर सरकारी स्कूलो में जाकर उनका बे्रन मैपिग करती हूं। सरकारी चिकित्सालयों का औचक निरीक्षण करती हूं। इसमें जिम्मेदारों की हीला हवाली अथवा शिथिलता बर्दाश्त नहीं। सरकार, शासन के मंशानुक्रम में सबकों शिक्षा सबको स्वास्थ मुहैया कराने की मेरी प्रथम प्राथमिकता है। इन दोनों मुद्दों के प्रति गंभीर हूं।
डीएनएः- आप चित्रकूट, फरूखाबाद तथा नोएडा में तैनात रही अब बहराइच में। आपकों किस जिले में प्रशासन करने में सुगमता का एहसास हुआ।
मोनिका रानीः- सभी जिले में शासन सरकार की समानान्तर योजनाएं संचालित है। मुझे हर जिले में सुगमता ही रही।
डीएनएः- आपकों गुस्सा कब आता है।
मोनिका रानीः- मुझे गुस्सा बहुत आता है (मुस्कुराते हुए)। जब समस्या का पूर्ण समाधान किये जाने की जगह अनावश्यक पत्र व्यवहार की विधा को प्राथमिकता दी जाने लगती है। हर समस्या का उसका समाधान है। इसलिए पत्राचार की रस्म कम समाधान के प्रति समर्पण ज्यादा होना चाहिए।
डीएनएः- आप उन प्रतियोगती युवक-युवतियों को क्या संदेश देना चाहती है। जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे है। उनके सफलता के लिए आपका क्या टिप्स है।
मोनिका रानीः- मै उन सभी युवक-युवतियों को जो यूपीएससी में प्रतिभागिता में भाग लिया, कदाचित उन्हें दुर्भाग्य से द्वितीय बार सफलता नहीं मिली तो वे निराश कदापि न हो। अपने असफलता के गूढ कारणों का सहज मन से मनन, चिन्तन करे और सम्पूर्ण ज्ञानवर्धता से तैयारी करे। जो प्रतिभागिता में प्रवेश की तैयारी कर रहे है वे वगैर किसी मानसिक दबाव के नियमित रूप से सुलभ समय की उपलब्धता में तैयारी करे। निराशा अथवा अवसाद को अपने समीप कदापि न आने दे। यदि दृढ़ इच्छा शक्ति है तो लाख झंझावतों के बाद भी सफलता निश्चित मिलेगी।

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