: इतिहास बदलने वाली एसपी वृंदा भूगोल बदलते चली गई!
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Tue, Apr 16, 2024
डा.एम.एस.परिहार/कुंवर दिवाकर सिंह
बहराइच। वेद पुराण और इतिहास इस बात के साक्षी है कि शक दंभ और प्रतिशोध से विस्फुटित अर्तःकरण ज्वाला में संधि की गुंजाइस क्षीण-दीर्ण ही होती है। त्रेतायुग में सीताहरण के उपरान्त लंकापति के समक्ष सीता वापसी की रामदूत अंगद की सन्धि प्रस्ताव निर्मूल साबित हुआ। द्वापर में स्वयं नारायण कृष्ण के संधि प्रस्ताव को कौरव कुलपति ने अस्वीकार कर दिया। परिणाम सामने रहे। प्रतिशोध में बड़े-बड़े और अति करीबी रिश्ते तार-तार हो जाते है। मध्यस्ता बीच संधि निर्मूल और वेदम सरीखा ही परिणाम निकलता है। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं। लेकिन युवा एसपी वृंदा शुक्ला ने अपने दृढ संकल्पित इच्छा शक्ति से उस मिथक को तोड़कर दिखाया जिसमें प्रतिशोध और अहंकार के दो पाटो में पिस रहे रिश्तों में सहर्ष संधि की संधि दिखाई और सुनाई दिया।
बा तारीख 13 अप्रैल दिन शनिवार सन 2024। पुलिस में लगे भव्य पड़ाल में हर्षित आभा पटल इतिहास का साक्षी बना। जहां आपसी खटपट से शुरू हुई तकरार पति-पत्नी के बीच विक्षोह की खाई बन गई। विक्षोह और प्रतिशोध से उपजी अहंकार की लड़ाई पुलिस चौखट पर दस्तक देने लगी। वृंदा ने 120 दम्पत्तियों में संधि कराकर एक नव चेतना शिख आरोहण का इतिहास रच डाला। इस हुई संधि के प्रति उनकी सलग्न तटस्ता या तटस्थ्य संलग्नता की ही देन है। वृंदा शुक्ला के छवि पटल की भाव भंजन भंगिमा जिसमें गजब की अप्रहरित जिजीविषा है जो उन्हें चैन से बैठने नही देती और हर दिन लोक हिर्ताथ में कुछ न कुछ नया और अपूर्व और अद्वितीय कर गुजरने के लिए उकसाती रहती है। उसी सुखद श्रृंखला के लडी की एक कडी है दुई बिछुडे मानव का अनमोल मेल कराने का संकल्प।
एसपी वृंदा शुक्ला ने जिले में बढ़ रहे पति पत्नी अर्तकलह में अलग हो रहे दम्पत्तियों में पुर्न शांति संधि कराने का मुहिम चलाया। वृंदा शुक्ला दुई संधि को लगभग एक आन्दोलन की तरह इस सारी मुहिम को बड़े ही संजीदगी तन्मयता से अनथक बढ़ाया। शुक्ला की यह सारी प्रक्रिया सारगर्भित प्रयासों में रचबस कर बहुत ही सहज और नामालून तरीके से चली। एसपी वृंदा के लोक लुभावन भगीरथी प्रयासों से यह स्पष्ट है कि उनके समााजिक उत्थान के प्रति सहजता और धैर्य अंदर छुपी हुई किसी उद्दाम जिजीविसा और अस्तित्व सुरक्षा की धीमी किन्तु तीव्र अनल के तरह थे। सर्वविदित है कि वृंदा शुक्ला के प्रत्येक समाजोन्मुख उत्थान में अथक आन्दोलन धर्मिता और महत्वाकांक्षा शीलता पायी जाती है, जिसकी जड़े वर्तमान समय समाज व परिवेश के धुरकाल में है। दुई बीच संधि ट्रायल एण्ड ऐरर भी प्रयोग धर्मिता इस आन्दोलन धर्मिता का सार तत्व रहा। पंक्तिवद्ध समीचीन होगा कि हालाकि वृंदा शुक्ला का कोई भी संकल्पित अभियान सिर्फ और सिर्फ लोक हितार्थ पर अवलम्बित होती है, जो निरन्तर और अनथक है। जिसमें अंतराल या समय की अनुकूलता जैसी बाधाओं से भी व्यक्ति क्रमित नहीं होती।
मुद्दा यह नहीं कि वृंदा शुक्ला ने 120 बिछड़े पौढ़, युवा, दम्पत्ति के बीच वंय संधि कराया। बात इस बात की है कि वृंदा शुक्ला ने जिन 120 कुनवों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी के जीवंत जीवन जीने का मार्ग सशक्त किया। वृंदा के इस एक भगीरथी प्रयासों से दो बिछुडे जीवन साथी को बर्बादी तबाही के कर्कश कहर के भव सिन्धु से पार करने में एक कुशल कुशाग्र नाविक की तरह पार करने में महती भूमिका का निर्वहन किया। इतना ही नहीं वृंदा शुक्ला ने इन दम्पत्तियांे के माथे पर पति-पत्नी छोड़ के लगने वाले कलंकित बदनुमें दाग और सामाजिक उपहास से निजात दिलाया। दूसरी इससे भी बड़ी बात कि यह कि पति-पत्नी के मध्य रार, दंभ, प्रतिशोध और अंहकार के विनाशकारी दो पाटो के बीच फंसी, अनसुलझी उन मासूमों के हसते खेलते बचपन थे। जिसके मुकद्दर में मां की ममता या पिता का वात्सल्य दोनों में एक को खोना ही था। उन पाल्यों के दिलो दिमाग में यक्ष प्रश्न उनके मर्मान्तक के गुत्थी जो जीवन काल तक उथल पुथल मचाती रहती। उस काल खण्ड के सर वृंदा शुक्ला ने सदा-सदा के लिए पूर्ण विराम लगाकर नया जीवन देने का सौगात दिया। वृंदा के इस सुखद सोपान सृजन करने के लिए पूरा समाज उनका ़ऋणी और उपकृत रहेगा इसमे दो राय नही।
13 अप्रैल को पुलिस लाइन पडाल में जो हर्षातिरेक बरखा की बौछार में आगन्तुक मेहमानों के स्वप्निल सपने सराबोर हो रहे थें। जहां एसपी वृंदा शुक्ला इनकी सफल जीवन की अनेकानेक शुभकामनाएं अर्पित कर सम्बोधन करके गिफ्ट पैकेट भेेंट किया वहीं एसपी शुक्ला के अधरो पर बिखर रही पूर्ण संतुष्टि की मुस्कान इस बात की चुगली कर रही थी कि जैसे उन्होंने खिलाड़ियों की एक टीम को कप्तान की भूमिका में विश्व कप विजेता का खिताब देश व समाज के नाम कर लिया हो। इतिहास बदलने वाली वृंदा भूगोल बदलती चली गई।
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सीन नम्बर 1ः-मंजू और बलराम
पात्र मंजू देवी और बलराम। गांव चाकूजोत थाना रामगांव। दोनों के मध्य आपसी पति, पत्नी के अन्तरकलह थाना मुकदमा होते हुए इसी 12 मार्च 23 को मामला एसपी वृंदा शुक्ला के दरबार में पहुंचा। आपसी आरोपों प्रत्यारोपों में दोनों के जीवन में पृथकतावास उस वक्त हुआ जब दोनों चार बच्चों के महतारी बाप हो गए। सुलह समझौता के तमाम प्रयास असफल हो चुके थे। मंजू और बलराम अपनी-अपनी अलग राह को चुन चुके थे। साथ-साथ रहना एक दूसरे को गवारा न था। अपनी रणनीति के मुताबिक एसपी शुक्ला ने मामले को परिवार परामर्श केन्द्र भेजकर केन्द्र प्रभारी दारोगा को कुछ निर्देश दिए। फिर वही हुआ जिसकी सहज कल्पना नहीं थी। अर्थात दुई बीच संधि की सहमति बन ही गई। वृंदा शुक्ला के भगीरथी प्रयासों से मंजू और बलराम फिर एक दूजे के हो गए। सारे आपसी गिले सिकवों को बिसार कर मंजू और बलराम अपने चार बच्चों के बीच हंसी खुशी से जिन्दगी गुजार रहे है।
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सीन नम्बरः-2ः- …और फिर से आरिफ की हुई शबाना
थाना रामगांव की निवासी है आरिफ और शबाना। दोनों का निकाह महज चार साल पहले हुआ था। अल्लाह के रहमो करम पर शबाना की गोद भर गई। उसके गोद में चार वर्ष का दुधमुहा नौनिहाल। दोनों के विचारों के मतभेंद से क्रान्ति का प्रार्दुभाव हुआ। आपसी अंर्तकलह के खटपट में मारपीट का इजाफा हुआ। शबाना ने अपने शौहर आरिफ पर दहेज मांगने का आरोप लगाते हुए पुलिस मोहकमें की ओर रूख किया। शबाना नौनिहाल को सीने से चिपका कर शौहर आरिफ को सबक सिखाने के लिए दहेज अधिनियम को हथियार बनाकर 17 फरवरी 23 को बजरिए दरखास एसपी शुक्ला के समक्ष पेश हुई। शबाना ने आरिफ के खिलाफ सीधे मुकदमा लिखाने की जिद पर अड गई। श्रीमती शुक्ला ने शबाना के व्यथित मनोभाव के मर्म को सुना और समझा और फिर शबाना के दरखास पर आवश्यक निर्देशों के साथ परिवार परामर्श केन्द्र रिफर कर दिया। शिद्दत से हुई काउंसलिग का परिणाम निहायत सार्थक निकला। आरिफ शबाना को केन्द्र में आमना सामना कराया गया। ब्रेनवाश इतना गहरा था कि दोनों ने भूली बिसरी बात बिसार कर एक दूजे के संगे दिल हो गए। श्रीमती शुक्ला के ही प्रयासों के बलबूते आज शबाना आरिफ के आंगन में कहकहों के बीच दुधमुहा मासूम किलकारिया मार मारकर वात्सल्य के झूले में मचल रहा है। गांव, गढ़ी, टोला, मोहल्ला, नईहर, पीहर सबके सब गदगद। थैक्यू मैडम वृंदा शुक्ला।
सीन नम्बरः-3ः- अब बीत गई सब बात, रूबी-प्रिंसू फिर हुए साथ!
थ्प्रंसू और रूबी की पटकथा कुछ लीक से हटकर है। रूबी ने 6 मार्च 2023 को अपने पति के खिलाफ जो दरख्वास्त एसपी मेम को दिया उसमें पति पर इल्जाम लगाया कि उसके पति शराब पीकर उसे मारते पीटते है। उनके साथ उसका कत्तई और किसी हाल में गुजारा नहीं हो सकता। रूबी ने एसपी साहिबा से फरियाद किया कि पानी सर के ऊपर हो गया है। उसके पति से उसके जीवन को खतरा है। मुकदमा लिखवा कर प्रिंसू को हर हाल में जेल भेज दिया जाय। अब वह किसी भी सूरत हाल में प्रिंसू के साथ नहीं रह सकती है। एसपी साहिबा के लाख समझाने के बावजूद वह अपने निर्णय से पीछे नहीं हट रही थी। बस सिर्फ प्रिंसू के खिलाफ सख्त कार्रवाई से इतर वह राजी नहीं थी। रूबी की बरबस बरस रही आंखे उसके आंतरिक वेदना के चश्मदीद गवाह थे। एसपी ने रूबी को ढाढस बधाया। उसके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ पुलिस उसके साथ होने का भरोसा दिलाया। सबसे अहम बात तो यह थी कि रूबी-प्रिंसू के 50 वर्ष वैवाहिक जीवन के बाद छुट्टम-छुट्टा की यह नौबत आई। घर, परिवार, सगे सम्बन्धी गांव जवार लाख जतन करने के बाद भी हार गए और रूबी प्रिंसू के रिश्तों के बीच खुदी खाई को पाटने में कामयाब न हो सके। लेकिन एसपी वृंदा शुक्ला द्वारा पूर्ण ईमानदारी से किये गए प्रयासों के चलते प्रिंसू-रूबी के बीच बुढापे में टूट चुकी वात्सल्य की डोर को बगैर गांठ बांधे जोड़ने में सफल रही। परामर्श केन्द्र के कार्मिकों के महती योगदान के चलते रूबी-प्रिंसू आज अपने अली नगर कोठार थाना फखरपुर में व्यस्त और मस्त है। प्रिंसू ने शराब छोड़ दी। दंगा फसाद बीते जमाने की बात हो गई। पिं्रसू-रूबी से पूछा गया कि जिन्दगी में अब कैसा धमाल है, त्वरित प्रतिक्रिया आई एसपी मैडम का ही तो कमाल है।
सीन नम्बरः-4ः-संगीता वर्सेज रविन्द्र कुमार
बात सौ टके सही नहीं कि बुढापे की दहलीज पर पति-पत्नी ही सुख दुख में एक दूसरे के पूरक होते है। साहब! ज्ब बुढापे में पति-पत्नी के रिश्ते की डोर चटख जाय तो कितना भयावह व करूणामयी मंजर होता होगा जीवन के मझधार में। कल्पना करना मुश्किल होगा। जी हां साब। संगीता देवी और रविन्द्र कुमार रिश्ते में पति-पत्नी है। उम्र यही तकरीबन 70 साल होगी। दोनों ने वैवाहिक जीवन का एक लम्बा सफर तय किया। फिर एकाएक इन दोनों के जिन्दगी में ज्वालामुखी का भूचाल आ गया। आंतरिक कारण की वजहें जो भी रही हो। संगीता ने रविन्द्र कुमार के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया। पति से सर्वथा अलग रहने पर आमादा हो गई। नाते-रिश्तेदारों, बाल-बच्चों द्वारा किए गए आपसी सुलह समझौतों के प्रयास नाकाफी साबित हुए। संगीता देवी रविन्द्र कुमार को कानूनी दण्ड दिलाने के लिए घर के चौखट की लक्ष्मण रेखा पार कर 5 मार्च 24 को सीधे पुलिस कप्तान वृंदा शुक्ला के कार्यालय आ धमकी। संगीता के हाथ में पति के खिलाफ प्रार्थना पत्र था। उसकी एसपी साहिबा से मुलाकात भी हो गई। कप्तान साहिबा पत्र की मजमून पढ़ते ही समझ गई कि असली माजरा क्या है। उन्होंने संगीता को समझाया आश्वस्त किया िकवे उसके पीड़ा को समझ रही है। उसके फरियाद पर जरूर कार्रवाई करेगी। संगीता के दरख्वास्त पर आवश्यक नोटिस कर पुलिसकर्मियों के साथ पुलिस परामर्श केन्द्र भेज दिया। बाकी तो उनके ऐसे मामलों में पहले से ही रणनीत मुकर्रर थी ही। परिणाम अत्यन्त मनभावन। संगीता-रविन्द्र कुमार के बीच उपजे तनाव, प्रतिशोध, पृथकतावादी सोंच का समाधान दसकों से अपने लोग नहीं कर पाये उसका समाधान जिले की पुलिस कप्तान वृंदा शुक्ला ने चंद दिनों में कर दिखाया। अन्ततःदोनों में संधि हो गई। रिसिया के इंदिरा नगर घर में दोनों वृद्ध दम्पत्ति कुनबो के बीच हंसी खुशी से जिन्दगी बिता रहे है। डीएनए प्रतिनिधि ने दोनों स ेअब के हाल पर सवाल किए तो संगीता सजल नेत्रो और भर्राये गले से अपने पल्लू के आंचल क्षितिज की ओर पसारते हुए बोली ’’मैडम कप्तान नहीं भगवान है’’ ईश्वर उन्हें सारे जहां की खुशी दे दें। रविन्दर ने तपाक से कहा मेरी बुढिया सही ही तो कह रही है। एसपी साहिबा सचमुच दुखियारों की भगवान ही है। कहते कहते रविन्द्र की आंखे छलक उठी।
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पुलिस परामर्श केन्द्र से निकले सुखदायी परिणाम
बहराइच। तरूण पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने जब जनपद का कार्यभार ग्रहण किया तो फरियादियों की कतार में परिवारिक पति-पत्नी के विवाद अपेक्षाकृत ज्यादा थे। उनमें अधिकाशतः महिलाओं की संख्या अधिक होती थी जो अपने पति के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई कराना चाहती थी। इसमें ज्यादातार मामले ऐसे होते थे जिसमें महिलाएं अपने पतियों से अलग रह चुकी होती थी या फिर रिश्ते टूटने के कगार पर होते थे। कुछेक में तो पति-पत्नी के आपसी रार के दो पाटो में नन्हें मुन्हें बच्चों की जिन्दगी अनायास पिस रही होती। वृंदा शुक्ला ने इस विकराल समस्या के लिए आंशिक नहीं पूर्ण समाधान वह भी आपसी संधि कराने के लिए संकल्प लिया। श्रीमती शुक्ला का संकल्प बहराइच में ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश में अव्वल निकला।
एसपी वृंदा शुक्ला ने सुस्त और अपने वजूद को खोज रहे पुलिस परामर्श केन्द्र को सक्रिय और गतिमान करने के लिए योग्य व्यवहार कुशल पुलिस उप निरीक्षक रमा शंकर मिश्रा को केन्द्र का प्रभारी नियुक्त किया। एक हेड मोहर्रिर ओम प्रकाश यादव समेत पांच तेज तर्रार महिला आरक्षियों को एसआई मिश्र के सहयोग में तैनात किया। अपने रणनीत के खाके से केन्द्र के कर्मिको को भलीभांति अवगत कराया। उन्हें पीड़ितों के साथ कैसा व्यवहार व समाधान करना है पाठ पढ़ाया। पीड़िताओं के प्रार्थना पत्र आवश्यक दिशा निर्देश के साथ परिवार परामर्श केन्द्र पहुंचने लगे। मैडम तत्काल कार्रवाई की नोटिंग करती है। केन्द्र के प्रभारी रमा शंकर मिश्र अपने सहयोगियों के साथ पूर्ण मनोयोग तथा ऊर्जा से एसपी मैडम के मंसूबों को परवान चढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। आपसी सुलह समझौतों के जो अति लघु समय में अप्रत्यासिक परिणाम आये उसके लिए एसपी मैडम के साथ-साथ केन्द्र प्रभारी समेत कर्मिको की प्रशंसा की जाये तो कम ही होगा। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 291 केस आये। जिनमें 120 मामलों में काउन्सलिंग कर सहर्ष आपसी सुलह समझौतों से निपटारा हो गया। इनमें 114 केस ऐसे थे जो परिवार परामर्श केन्द्र से बाहर ही निपटारे हो गए। जिनमें कुछ कोर्ट गए होगे तो बहुधा आपस में ही समझ लिए होगे। 57 केस अभी लम्बित है जो जल्द ही परामर्श केन्द्र में संन्दर्भित होकर आये है।
दशकों, वर्षो-वरस से जूझ रहे दम्पत्तियों के मामले को एसपी वृंदा शुक्ला के कुशाग्र निर्देशन में परामर्श केन्द्र के प्रभारी ने सुगमता से पूर्ण समाधान किया। जिसकी निराली मनोहारी दृश्य 13 अप्रैल को पुलिस लाइन के विशेष पड़ाल में देखने को मिली। भविष्य के गर्भ को साधने की दूरदर्शी क्षमता की धनी वृंदा शुक्ला ने इस मुद्दे पर एक नवीन आयाम को परवान चढ़ाया। पतियों से पीड़ित महिलाएं पुलिस कप्तान कार्यालय का चक्कर लगाती। पति निरदुन्द्व होकर घरो में रहता। बगैर दोनों उपस्थित हुए समस्या समाधान की गुंजाइश नहीं। एसपी शुक्ला ने इस समस्या का समाधान भी चुटकी बजाते निकाल लिया। उन्होंने सम्बन्धित थानों के बीट आरक्षी को निर्देशित किया कि उभय पक्ष को प्रत्येक दशा में नियत तिथि पर परामर्श केन्द्र पर लाना सुनिश्चित करें।
कप्तान के फरमान वह भी वृंदा शुक्ला के अवहेलना अथवा टाल मटोल, लेट लतीफी करने में इतनी जुर्रत किसमें। दोनों पक्ष आते रहे और संधि का समाधान परवान अपने पूरे शबाब पर चढ़ता गया। जो आज एक अमिट शिला लेख की लकीर बन गई।
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