: क्रांतिकारी पं. राम प्रसाद बिस्मिल का 127वां जन्म दिवस मनाया गया
Admin
Tue, Jun 11, 2024
सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके क्रांतिकारी विचारों और वर्तमान में उसकी उपयोगिता पर की चर्चा
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में स्वतंत्रता आन्दोलन के सबसे मशहूर एवं मजबूत क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का 127वां जन्म दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके क्रांतिकारी विचारों और वर्तमान में उसकी उपयोगिता पर चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिलएक अच्छे कवि थे। उनके नेतृत्व में काकोरी काण्ड जैसी अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाली घटना सम्पादित हुई। उनके साथ अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई। वें हिन्दी से ज्यादा उर्दू भाषा के ज्ञाता थे। वर्ष 1921 में उन्होंने ‘‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजूए कातिल में है‘‘ नामक देशभक्ति कविता लिखी। जिसे अपने साथियों के साथ मुकदमे के दौरान अदालत में सामूहिक रूप से गाकर उसे अत्यधिक लोकप्रिय बनाया। संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी विचारधारा के राम प्रसाद बिस्मिल प्रमुख सेनानी थे। वें मैनपुरी षड्यंत्र व काकोरी काण्ड सहित तमाम घटनाओं में शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। वें क्रांतिकारियों में सबसे वरिष्ठ और उनके मार्गदर्शक थे। अधिवक्ता दिनेश मिश्र ने कहा कि उनके आर्य समाजी क्रांतिकारी भाई परमानन्द को अंग्रेजों द्वारा षड्यंत्र पूर्वक फांसी की सजा सुनाए जाने पर उनका खून खौल उठा। स्वामी सोमदेव उनके गुरु थे। उनकी माता जी का उनके लिए सबसे बड़ा आदेश यह था कि‘‘उनके द्वारा किसी के भी प्राणों की हानि न हो ‘‘कई बार इस प्रतिज्ञा के चलते उन्हें दुश्मनों को बिना हानि पहुंचाए छोड़ना पड़ा। अन्त में सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके जीवन से देश प्रेम की सीख लेकर देश सेवा के संकल्प के साथ कार्यक्रम समाप्त किया। कार्यक्रम में अधिवक्ता राम रूप मिश्र, विनय तिवारी, अवनींद्र पाण्डेय, लल्ला वर्मा, संजय कुमार मिश्र सहित तमाम देश भक्त मौजूद रहे।
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