वेंटीलेटर पर जिला जेल का अस्पताल : बंदी ही करते है बंदी का ज्यादातर इलाज
Kunwar Diwakar Singh
Fri, Nov 14, 2025
बदहाल व्यवस्था पर डाक्टर के पास नहीं रहा सटीक जवाब
कुंवर दिवाकर सिंह
बहराइच। जिला जेल में संचालित अस्पताल में एक चिकित्सक समेत दो फार्मेसिस्ट की तैनाती है। फिर भी बंदियों के लिए मुकम्मल चिकित्सा व्यवस्था नहीं है। बंदियों का इलाज भगवान भरोसे। चिकित्सक जब चाहे आये जब चाहे जाए कोई पाबंदी नहीं। फार्मेसिस्टों के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं वें पूर्ण स्वेच्छाचारी है। दो तीन बंदी ही सैकड़ों बंदियों का अपने अनुभव से इलाज करते है। दवा वितरण पंजिका पर उनके हस्तलेख इसके साक्षी है। बंदी चाहे जिस मर्ज से पीड़ित हो उसको पैरासिटामाल समेत दो तीन दवाइयां उसके नसीब के लिए काफी है। यह जेल का दवा वितरण रजिस्टर गवाही है। एक तरीके से देखा जाये तो अस्पताल खुद ही वेंटीलेटर पर है। इस व्यवस्था की सच्चाई बेधड़क बया करते है जेल से रिहा हुए पूर्व बंदी। यह कैसी विचित्र विडम्बना है कि जेल के भीतर निरूद्ध सैकड़ों बंदियों में से हृदय रोग, शुगर, नेत्र रोगी, चर्म रोग, न्यूरो आदि रोगों से पीड़ित रहते है। लेकिन जेल में तैनात डाक्टर साहब न हृदय रोग विशेषज्ञ न आर्थो और न ही न्यूरो और न ही नेत्र रोग आदि के विशेषज्ञ है। फिर भी वे उन गंभीर बीमारियों से ग्रसित बंदियों का इलाज फौरी तौर पर कैसे करते है? यह तो वही बता सकते है। वैसे जिला चिकित्सालय की सेवाए चौबीसों घण्टे चलती है। ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी, पीएचसी प्रातः 10 बजे से सायं पांच बजे तक ओपीडी चलती है। चिकित्सक मौजूद रहकर मरीजों का इलाज करते है। वहीं जेल चिकित्सालय तथा पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए बंदियों के प्रति न तो कोई पूर्ण संवेदना है और न ही उनका समय ही मुर्करर नहीं। रिहाई पाये कमोवेश सभी बंदियों का एक जैसा सीधा सपाट उदगार। उनका कहना है कि जेल के डाक्टर साहब बंदियों को दूर खड़ा करके मर्ज पूंछ कर दवाई लिखते है। चेकअप तो वहां लगे उनके बंदी करते है। इंजेक्शन फार्मेसिस्ट नहीं अनुभवहीन बंदी लगाते है। गंभीर बीमारियों में भी जेल की सामान्य दवाए वह भी दो खुराक दवाए देकर इतिश्री कर दी जाती है। फलतः बंदियों को शाम, सुबह नाश्ता, खाना छोड़कर दवा लेने में जेल अस्पताल में आना होता है। चर्म रोगियों को कागज पर थोड़ा सा मलहम दिया जाता है और नेत्र रोग से पीड़ित बंदियों के आंखों में दवा डालकर वापस कर दिया जाता है। भले ही जेल में बंदियों को परोसा जाने वाला खाना गुणवत्ता व मानक के परीक्षण का कार्य जेल चिकित्सक को करना होता है। लेकिन वे इसके प्रति कदापि सजग व संवेदनशील नहीं है। कभी भी बंदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को नहीं परखते। यह बात रिहाई पाये सैकड़ों बंदी बेधड़क बताते है। खराब भोजन बंदियों को वितरित होते है। लेकिन डा.साहब के नजर में जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को परोसे जा रहे गुणवत्ताविहीन भोजन की नाजायज व्यवस्था उन्हें जायज लगता है। बंदियों की वास्तविक पीड़ा व मर्ज सुनने के लिए फुर्सत ही नहीं। यह और कोई नहीं जेल से रिहा हुए पूर्व बंदी ही अपना आक्रोश जाहिर करते हुए बयां करते है। चिकित्सक और फार्मासिस्टों के जेल में आने जाने का सिलसिला जेल के गेट रजिस्टर और समय जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे खुद इसके साक्षी है।
बंदियों के भोजन गुणवत्ता पर दूगा ध्यानः डा.ए.के.वर्मा
बहराइच। इस संबंध में जब डेली न्यूज के संवाददाता ने सायं 6ः40 पर जेल के चिकित्सक डा.अनिल कुमार वर्मा के मोबाइल नम्बर 9454501311 पर पूछा गया कि रिहाई पाये बंदियों का आरोप है कि उन्हें गुणवत्ताविहीन भोजन परोसा जाता था। अनुपयोगी हो चुके भिंडी, तरोई, जड़ीला तथा सागो में बड़े-बड़े डण्ठल परोसे जाते है। दाल में दाल कम पानी की मात्रा बहुतायत होती है। जिसे बंदी भरपेट भोजन से इतर रहते है। क्या गुणवत्ता परखने के लिए आप की जिम्मेदारी है या नहीं? क्या कभी आप भोजन की गुणवत्ता को जांचा परखा? इस संबंध में डा.श्री वर्मा ने बताया कि साग, सब्जी तो भण्डारखाने में लगे बंदी ही काटते बनाते है। कभी-कभी हम चेक करते है। इस सवाल पर क्या बंदियों को ऐसे अनुपयोगी साग, सब्जियों की आपूर्ति करने का काम जेल प्रशासन का नहीं होता है? इस पर उन्होंने कहा कि अब मेरे संज्ञान में बात आयी है इसको जरूर देखूगा। संवाददाता ने बंदियों के चिकित्सा सुविधा के बारे में पूंछा कि क्या बंदियों को जो इंजेक्शन लगाए जाते है और जो दवाएं उन्हें दी जाती है उसके लिए अस्पताल में लगे बंदी अधिकृत है? डा.वर्मा ने बताया कि नहीं। नियमतः रोगी बंदियों को इंजेक्शन लगाने और दवा बांटने का काम फार्मासिस्ट का है बंदी का नहीं। यह सच है कि बंदी इंजेक्शन भी लगाते है और दवाईयां भी बांटते है जो गलत है। डा.वर्मा ने कहा कि बंदियों के सामान्य रोग में उन्हें एक दिन की ही दवाई दी जाती है। सर्दी, जुकाम में यदि उन्हें ज्यादा सेट्राजीन दे दिया जाये तो वे नशे के रूप में प्रयोग कर सकते है। मै 11 बजे जाता हूं 03 बजे वापस आ जाता हूं।
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