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: श्रद्धा के साथ करें श्राद्ध, जीवन में आ रही बाधाएं होगी समाप्तः रमेश चन्द्र शास्त्री

पितृ पक्ष का आरंभ 18 सितंबर से
श्रद्धा के साथ श्राद्ध के करें कार्य
बहराइच। काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विश्व पंचांग के अनुसार तो पितृ पक्ष का आरंभ 17 सितंबर से होने जा रहा है। लेकिन इस दिन श्राद्ध नहीं किया जाएगा। क्योंकि 17 सितंबर इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा का जो व्रत रहेगा। 18 सितंबर को प्रातः 08ः 51 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी और प्रतिपदा तिथि क्षय में रहेगी इसलिए 18 सितंबर को ऋषि श्राद्ध (पूर्णिमासी का श्राद्ध) और प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध रहेगा। ऐसे में 18 सितंबर से पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, तर्पण, दान आदि कार्य आरंभ हो जाएगा। पितृ पक्ष का आरंभ देखा जाए तो 18 सितंबर से हो रहा है और 02 अक्टूबर तक यह चलेगा।

श्राद्ध की सभी तिथियां
18 सितंबर बुधवार प्रर्णिमा श्राद्ध (ऋषियों के नाम से तर्पण)
18 सितंबर बुधवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध (पितृपक्ष आरंभ)
19 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध।
20 सितंबर शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध।
21 सितंबर शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध।
22 सितंबर शनिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध।
23 सितंबर सोमवार षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध।
24 सितंबर मंगलवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध।
25 सितंबर बुधवार नवमी तिथि का श्राद्ध।
26 सितंबर गुरुवार दशमी तिथि का श्राद्ध।
27 सितंबर शुक्रवार एकादशी तिथि का श्राद्ध।
29 सितंबर रविवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध।
30 सितंबर सोमवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध।
01 अक्टूबर मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध।
02 अक्टूबर बुधवार सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध।

पितरों की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 11.30 से लगभग 12.30 बजे तक का
इस समय श्राद्ध करना सबसे उत्तम है। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में सुबह और शाम के समय देवी देवताओं की पूजा की जाती है और पितरों की पूजा के लिए दोपहर का समय होता है। पितरों की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 11.30 से लगभग 12.30 बजे तक का समय सबसे उत्तम होता है। इसलिए लिए आपको पंचांग में अभिजीत मुहूर्त देखने के बाद ही श्राद्ध कर्म करें। श्रद्धा के साथ श्राद्ध के कार्य करें इसलिए ही इसे श्राद्ध कहते हैं। जिस भी दिन श्राद्ध कार्य करते हैं उस दिन ब्राह्मण को भोजन जरूर कराएं। साथ ही दान दक्षिणा दें। श्राद्ध वाले दिन गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी को भी भोजन कराया जाता है।

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पितृदोष से बचने के लिए करें ये उपाय
बहराइच। आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार जीवन में असफलता, लगातार एक के बाद एक आर्थिक हानि और घर परिवार में लड़ाई झगड़े होते हैं या फिर संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है तो यह सब पितृ दोष का कारण हो सकता है। इसलिए पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दें उनके नाम से दान आदि का कार्य करें। साथ ही श्रद्धा पूर्वक पूरे विधि विधान से उनका श्राद्ध करें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितृ दोष निवारण के लिए पितृपक्ष में श्रीमद् भागवत महापुराण का संपूर्ण मूल पाठ करने अथवा करवाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पुराण के अनुसार धुंधकारी नामक पितृ के उद्धार के लिए गोकर्ण जी महाराज ने उसे भागवत महापुराण का मूल पाठ श्रवण कराया था जिससे उसकी मुक्ति हुई। महापुराण के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा अनुसार पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करता है उसके जीवन में आ रही बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

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