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: राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां व ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान दिवस मनाया गया

सेनानी उत्तराधिकारियों ने तीनों क्रांतिकारियों को अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में मंगलवार को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी इतिहास के सबसे प्रखर प्रहरी पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान दिवस मनाया गया। उपस्थित सेनानी उत्तराधिकारियों ने तीनों क्रांतिकारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों में सबसे उम्रदराज अनुभवी क्रांतिकारी थे। वे मैनपुरी षड्यंत्र, काकोरी काण्ड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे। वे रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। उन्हें अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह के साथ 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई। ‘‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…नामक क्रांतिकारी गीत और नारा इन्हीं का बनाया हुआ है। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि अशफाक उल्ला खां एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी देशभक्त थे। वे पूरे जीवन हिन्दू मुस्लिम एकता के पक्षधर रहे। बंगाल के क्रांतिकारियों का उनके जीवन पर बहुत प्रभाव था। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को वो अपना सहोदर भाई मानते थे। चौरी चौरा घटना के बाद जब महात्मा गांधी जी ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया तो अशफाक उल्ला खां असंतुष्ट हो गये थे। समाजसेवी एवं अधिवक्ता राम रूप मिश्र ने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी सेनानी थे। काकोरी काण्ड के 4600/- रूपए की लूट करने वाले इन क्रांतिकारियों को गिरफतार करने के लिए 10 लाख रुपए ब्रिटिश सरकार ने खर्च किये। उनके द्वारा कारित 9 अगस्त1925 को काकोरी काण्ड की घटना ब्रिटिश सरकार के खिलाफ युद्ध में हथियार खरीदने के लिए एक ट्रेन से ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटने की थी। अन्त में सेनानी उत्तराधिकारियों एवं समाजसेवी पवन सिंह, सहीम, संतोष सिंह, रवि जायसवाल, अधिवक्ता राजेश शर्मा ने इन तीनों शहीदों की यशगाथा का क्रम वार वर्णन किया और उनके आदर्शों पर चलने के संकल्प के साथ कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई।

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