: वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस मनाया गया
Admin
Tue, Jun 18, 2024
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में देश भक्तों ने 1857 की जंग में उनके देश के प्रति समर्पण और वीरता की चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि उनके बहादुर घोड़े का नाम बादल था, जो उनकी शहादत तक दुश्मनों से लड़ता रहा। अंग्रेजों की हड़पो नीति के कारण ही झांसी की लड़ाई हुई थी। रानी लक्ष्मीबाई ने सात दिन तक वीरता पूर्वक झांसी की सुरक्षा की और अपनी छोटी सी सशस्त्र सेना से अंग्रेजों का बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया। वें अकेले ही अपनी पीठ पर बेटे दामोदर राव को बांध कर अंग्रेजों से युद्ध करती रहीं। संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि अमर शहीद लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी राज्य की रानी थी और सत्तावनीं क्रांति की नेतृत्व कर्ता के रूप में मात्र 29 वर्ष की आयु में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से भीषण युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका उपनाम मनु रखा गया था। जबकि उनके माता-पिता उन्हें मणिकर्णिका कहकर पुकारते थे। समाजसेवी अधिवक्ता राम रूप मिश्र ने कहा कि ग्वालियर स्थित निर्मोही अखाड़े के समीप गंगा दास के मठ में लक्ष्मीबाई ने अपनी अंतिम सांस ली। इसी स्थान पर आज उनका स्मारक है और उनके नाम से लक्ष्मीबाई कालोनी भी बसी है। रानी लक्ष्मीबाई और नबाब अलीबहादुर द्वितीय का रिश्ता भाई बहन का था। लक्ष्मीबाई उन्हें राखी बांधती थी और इसी कारण वह 1858 की जंग में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा। अन्त में सेनानी उत्तराधिकारियों ने कहा कि सम्पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई का दम खम ही था कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज की एक बटालियन का नाम रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड रखा। कार्यक्रम में पवन शर्मा, राजेश वोट, रोहित कुमार चौधरी, दिनेश मिश्र, अश्विनी पाण्डेय सहित तमाम देश भक्त मौजूद रहे।
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