चहलारी नरेश बलभद्र सिंह आज के युवाओं के प्रेरणाश्रोत : शहीद चहलारी नरेश बलभद्र सिंह का 167 वां शहादत दिवस मनाया गया
Kunwar Diwakar Singh
Fri, Jun 13, 2025
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857-58 में शहीद चहलारी नरेश बलभद्र सिंह का 167 वां शहादत दिवस मनाया गया। अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिला इकाई बहराइच/श्रावस्ती के उपस्थित सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने अमर शहीद महाराजा बलभद्र सिंह के युद्ध कौशल और अटूट राष्ट्र भक्ति की सराहना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि चहलारी नरेश बलभद्र सिंह का जन्म 10 जून 1840 को हुआ था। बाल्यकाल से ही उनके अन्दर देशभक्ति कूट कूट कर भरी थी। जब बेगम हजरत महल बाराबंकी के महादेवा में राम चबूतरे पर अंग्रेजी सेना से संग्राम हेतु अवध के राजे रजवाड़ों का आवाहन किया तो किसी रजवाड़े की हिम्मत नहीं हुई कि सोने से जड़ित तलवार उठा कर पान का बीड़ा चबायेए लेकिन इसी बीच अट्ठारह वर्षीय तरूण सेनानी बलभद्र सिंह ने तलवार उठा कर पान का बीड़ा चबाया और अंग्रेजों की सेना से युद्ध करने को तैयार हुआ। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और सर कटने के बावजूद अनेकों अंग्रेज सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और अपनी शहादत दी। संगठन संरक्षक एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे जनपद में एक महावीर पैदा हुआ। वीर तो बहुत होते हैं जो परिस्थितियों के विपरीत होते ही संघर्ष से विमुख हो जाते हैं किन्तु महावीर वह होता है जो किसी भी बात का विचार किए बगैर अपनी अंतिम सांस तक समर करता है। चहलारी नरेश बलभद्र सिंह ऐसे महावीर थे जो अपनी अंतिम सांस के बाद भी अपने विरोधी का वध करते रहे। गोण्डा नरेश राजा देवी बक्स सिंह के वंशज माधव राज सिंह ने कहा कि दोआब और अयोध्या के राजनेताओं और धार्मिक नेताओं द्वारा आयोजित देश की आजादी के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम चहलारी नरेश बलभद्र सिंह को ओबरी बाराबंकी में 13 जून 1858 को वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध में सर धड़ से अलग हो जाने के बाद भी उनका धड़ युद्ध भूमि में लड़ता रहा। जिससे अंग्रेजी सेना में भगदड़ मची। लोग दांतों तले उंगली दबाने लगे। इससे प्रेरित भारतीय सेना के बढ़ चढ़ कर हाथ करने की प्रेरणा देखकर अंग्रेजी सेना भाग खड़ी हुई। इसी युद्ध में राजा देवी बक्स सिंह के मोर्चे पर अंग्रेजी सेना के सेनापति लार्ड कैम्बैल क्लाइड घायल हुआ जिसे अंग्रेजी सेना लेकर भाग खड़ी हुई। चहलारी नरेश बलभद्र सिंह की गौरव गाथा भारत से लेकर इंग्लैंड तक छा गई। चहलारी नरेश बलभद्र सिंह के वंशज उत्तराधिकारी आदित्य भान सिंह ने कहा कि अंग्रेज सेनापति होपग्रांट ने अपनी पुस्तक द सिपायवार में और सैनिक अधिकारी व प्रेस रिपोर्टर विलियम रसल ने अपनी डायरी में चहलारी नरेश बलभद्र सिंह की वीरता की भूरि भूरि प्रशंसा की है। दुश्मन जिसकी प्रशंसा करे वही प्रशंसनीय है। अन्त में उपस्थित जनों ने एक स्वर में कहा कि अवध के सेनापति का पदभार ग्रहण करने और अंग्रेजों से युद्ध करने को लेकर चहलारी नरेश बलभद्र सिंह आज के युवाओं के प्रेरणाश्रोत हैं और उन्हें सदैव याद रखा जाएगा। सभी लोगों ने चहलारी नरेश बलभद्र सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण पुष्पांजलि अर्पित करने के पश्चात कार्यक्रम समाप्त किया। कार्यक्रम में अखिलेश प्रताप सिंह, संगठन के महामंत्री राजू मिश्र उर्फ मुन्ना भैया, गौतम अग्रवाल सहित तमाम देश भक्त मौजूद रहे।
ऐसे बलिदानियों से हमें सीख लेने की जरूरत
चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के नाम से चौक व संस्थान स्थापित करने की मांग
बहराइच। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अवध की सेना के सेनापति चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के 168वें बलिदान दिवस पर लौकाही में संजय वैश्य के संयोजन में श्रद्धांजलि-समर्पण समारोह हेमराज सिंह की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें मुख्य रूप से मौजूद वरिष्ठ नेता विनय सिंह ने कहा कि बहराइच जिले के रेंठ नदी के तट पर 1857में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जो अंग्रेजों के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध था। जिसका नेतृत्व अवध की सेना के 600 रणबांकुरों के साथ चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह रैकवार कुशल सेनापति के रूप में कर रहे थे। मात्र 18वर्ष की आयु में रक्त की अंतिम बूंद तक संघर्ष करते हुए 13जून 1858 को गांजर का लाल भारत माता की गोद में चिरनिद्रा में लीन हो गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे माँ भारती के अखंड अनुराग शत्-शत् वीरोचित नमन् करना हम सभी का परम कर्तव्य है। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में पूर्व बैंक अधिकारी हेमराज सिंह ने कहा कि 1857के स्वतंत्रता संग्राम के वीर अभिमन्यु बलभद्र सिंह रैकवार जिन्होंने ओवरी युद्ध के महानायक के तौर पर सर कट जाने के बाद भी निरंतर जंग लड कर अपने पराक्रम का अनोखा उदाहरण पेश किया था। कार्यक्रम संयोजक संजय वैश्य ने कहा कि ऐसे बलिदानियों से हमें सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के नाम से चौक तथा संस्थान स्थापित करने की मांग की। संचालन तूफान सिंह ने किया। इस अवसर पर सौरभ सिंह, बृजेश सिंह, अन्नू सिंह, लोकेन्द्र सिंह, अभय, मगन सहित कई लोगों ने अपने सम्बोधन में चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के कृतित्व और ब्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
विज्ञापन