: तरु-लसी लता कोई देखूं तो घंटो होश नहीं आता
Admin
Mon, Feb 26, 2024
संत शिरोमणि रविदास की जयंती पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
बहराइच। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा राम जानकी मंदिर छावनी में संत शिरोमणि रविदास की जयन्ती मनाई। पूजा आरती की गई, भजन गाये गए और राधाकृष्ण पाठक की अध्यक्षता तथा रमेश चन्द्र तिवारी के संचालन में संत शिरोमणिं रविदास के जीवन पर आधारित एक काब्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवि, लेखक, साहित्यकार सहित बहुत से श्रोता, श्रद्धालु शामिल हुए। भारत के महान संतों में उच्च स्थान प्राप्त संत रविदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए श्री पाठक ने कहा ‘‘सन तेरह सौ सतहत्तर में जन्में श्री रविदास, मुक्त क्षेत्र वाराणसी करते वहीँ निवास। धर्म-कर्म के बीच समन्वय सदा बनाते, तभी भक्त रविदास शिरोमणि संत कहाते।‘‘ संत शोरोमणिं के सन्देश को गुलाब चन्द्र जायसवाल ने इस तरह व्यक्त किया ‘‘आज मातृभूमि से उठ रही यही पुकार, जातिवादी बंधनों को नष्ट कर दीजिये। प.ं‘‘ राधा कृष्ण शुक्ल ‘पथिक’ ने पढ़ा ‘‘तरु-लसी लता कोई देखूं तो घंटो होश नहीं आता। पुण्डरीक पांडेय ने अपनी कविता प्रस्तुत की। ‘‘संत शिरोमणि पूज्य थे। महा संत रविदास, शब्द शब्द उनका सदा करता रहा प्रकाश। ‘‘ कवि अजित कुमार मौर्य ने पढ़ाः ‘‘मिले आशीष गुरुवर का तो जीवन धन्य हो जाये, भगीरथ सम अगर तप हो पाप सब पुण्य हो जाए।‘‘ राम सूरत वर्मा ‘जलज‘ ने सुन्दर सी कविता पढ़ीः ‘‘तम में दीपक जलाते रहो साथियो, धर्म अपना निभाते रहो साथियो।‘‘ कार्यक्रम में तमाम अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को ओतप्रोत किया।
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