सीतापुर की सीमा पर स्थित जमीनों पर किसानों को जुताई से रोका गया : सैकड़ों किसान गेंहू की बुवाई से हो जायेगे वंचित
Kunwar Diwakar Singh
Mon, Nov 17, 2025
बहराइच। घाघरा की कटान में अपना घर बार व कृषि जमीन गंवा चुके किसान अब नदी में समाहित अपनी ही खेती योग्य जमीन पर खेती करने से वंचित किए जा रहे है। जबकि बीते दस वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे है। बहराइच-सीतापुर जनपद का सीमा विवाद के चलते अब किसानों को इस जमीन पर खेती से रोक दिया गया है। जिस पर गांव के किसानों ने क्षेत्रीय विधायक सुरेश्वर सिंह से गुहार लगाकर खेती योग्य जमीने वापस दिलाने की मांग की है। मामला तहसील महसी अन्तर्गत ग्राम मुरौव्वा का है। जहां बीते कई वर्षों पूर्व किसानों की जमीन व घरबार नदी में समाहित हो गए थे। नदी में समाहित खेती योग्य जमीन घाघरा की छड़ान के बाद वर्ष 2014-2015 में तत्कालीन महसी एसडीएम द्वारा घाघरा की कछार में पड़ी किसानों की जमीन व ग्राम समाज की भूमि को गांव के किसानों को आवंटित कर दिया गया था। जिस पर वे तभी से खेती कर रहे है। ग्राम मुरौव्वा की सीमा घाघरा नदी पार जनपद सीतापुर के ग्राम रंडाकोडर से मिली हुई है। दोनों गांवों की जमीनों की सीमा स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में सीतापुर के ग्राम रंडाकोडर में चकबंदी कार्य भी चल रहा है। ऐसे में दोनों तहसीलों के अधिकारियों द्वारा किसानों को गांव की सीमा पर स्थित जमीनों को जोतने से मना कर दिया गया है। वर्तमान में गेंहू की बुवाई का समय चल रहा है। किसानों को खेत जोतने से मना करने के चलते किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे है। गांव के चार दर्जन से अधिक किसान सोमवार को क्षेत्रीय विधायक सुरेश्वर सिंह से मिलकर अपनी समस्या बतायी। जिस पर विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जिलाधिकारी से वार्ता कर समस्या का हल कराया जायेगा। शिकायत पत्र देने वालों में कुसुम, समयदेवी, दिनेश, कैलाश, पवन, भगौती, बुधई, शिवगोविन्द, विष्णु प्रताप, विपिन सिंह, दिवाकर, ननकये, पुतान, सिद्धू, रामू, वीरू सिंह, बेचे लाल, आदित्यभान सालिगराम, बृजेश, कंधई सहित चार दर्जन से अधिक किसान शामिल है।
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