किसान अपनी गन्ना फसल पर विशेष ध्यान दे और गन्ने का उत्पादन बढ़ाएः राठी : मझारा तौकली में बृहद किसान गोष्ठी का आयोजन
Kunwar Diwakar Singh
Mon, Jun 9, 2025
फखरपुर, बहराइच। पारले कंपनी क्षेत्र के ग्राम बदरौली एवं मझारा तौकली में बृहद किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें 248 किसानो द्वारा प्रतिभाग किया गया। गोष्ठी का संचालन कंपनी के उप मुख्य प्रबंधक संजीव राठी द्वारा किया गया। गोष्ठी को वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.एस.एन.सिंह एवं डा.बी.डी. सिंह द्वारा सम्बोधित किया गया। उन्होंने कहा कि इस समय गन्ना फसल में ब्यांत का समय है। तत्काल सिचाई करे। बिना सिचाई के फसल सूख रही है। 15 दिनों के अंतराल पर 2 बार 100 किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करे। खरपतवार नियंत्रण बहुत आवशयक है। नहीं तो गन्ने की पैदावार पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जुताई-गुड़ाई करते रहे। पेड़ी के प्लाटो में जंहा खाली जगह 2 फीट तक है गैप फिलिंग कर दे। गन्ना फसल की बढ़वार अच्छी हो इसके लिए एनपीके ( 19ः19ः19 ) 2 किलो मात्रा एवं इमिडा की 100 मिली. मात्रा को 250 ली. पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर 2 बार स्प्रे जरूर करे। 0238 प्रजाति को रेड रॉट बीमारी से बचाये। इसके लिए 10 किलो ट्राइकोडर्मा को जैविक खाद के साथ मिलाकर 15 दिनों के अंतराल पर 2 बार नमी की दशा में जड़ो के पास प्रयोग करे। इसके अलावा अमीस्टार टॉप फफूंदीनाशक 250 मिली. दवा को 250 ली. पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर स्प्रे करे। बायो एक्सट्रेक्ट 5 ली. मात्रा को 400 ली. पानी में मिलाकर भी ड्रेंचिंग कर सकते है। इससे प्रभावी तौर पर फसल निरोग होगी। उत्पादन में इजाफा होगा। कंपनी क्षेत्र में किसानो की गन्ना पैदावार बहुत ही कम है जो निराशाजनक है। जबकि कंपनी का गन्ना मूल्य भुगतान प्रदेश में पहले स्थान पर है। लेकिन गन्ना उत्पादन निचले पायदान पर है। यह किसानो और कंपनी के लिए बिलकुल ठीक नहीं है और चिंता का विषय है। कंपनी की पेराई क्षमता इस समय कम से कम एक करोड़ कुंतल गन्ने की है। लेकिन पिछले सीजन मात्र 75.88 लाख कुंतल गन्ना मिला। इससे क्षेत्र के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और कंपनी का भी आर्थिक भारी नुक्सान है। किसान अपनी गन्ना फसल पर विशेष ध्यान दे और गन्ने का उत्पादन बढ़ाए। इससे किसान की आय में बढ़ोतरी होगी। क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। खेती को वैज्ञानिक और व्यापारिक तरीके से करे। समय के अनुसार खेती में कार्य करे। स्वीकृत प्रजातियों की ही बुवाई करे। वैज्ञानिको ने यह भी कहा की गन्ने उत्पादन कम होने का मुख्य कारण बुवाई में लाइन से लाइन की दूरी का कम होना भी है जो 4 फीट होना चाहिए। लेकिन किसान अभी भी कम दूरी पर गन्ने की बुवाई कर रहे है। अस्वीकृत गन्ना प्रजाति सीओपी के 5191 की बुवाई बिल्कुल ना करे। जो किसान कोशा 08272 के नाम पर लगा रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि गन्ना फसल में मिट्टी जरूर चढ़ाये। ऑटम फसल में 15 जून तक, अन्य पेड़ी एवं पौधा फसल में 2 बार माह जून के अंत और जुलाई में पूरी मिट्टी चढ़ा दे। मिट्टी चढाने से पूर्व 3 बैग ऑर्गनिक पोटाश प्रति एकड़ प्रयोग करे। जिससे फसल का विकास अच्छा होगा। भूमि की उर्वरा शक्ति एवं पैदावार बढे इसके लिए पारले जैविक एवं बायो प्रोडक्ट्स का अधिक से अधिक प्रयोग करे। जो किसानो को हमेशा भारी अनुदान पर दिए जा रहे है। गोष्ठी के बाद वैज्ञानिको द्वारा किसानो की फसल का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय कीट-बीमारी के नियंत्रण के बारे में भी बताया। इस अवसर पर भारी संख्या में किसान एवं पारले के अन्य अधिकारी गण आदर्श, भूपेंद्र, दीपक और सभी फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।
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