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हाता कटाई के नाम जेल में बंदियों से अवैध वसूली : पन्द्रह सौ, पच्चीस सौ, साढे सात हजार अवैध वसूली का बना रखा है क्राइट एरिया

Kunwar Diwakar Singh

Thu, Nov 13, 2025

कुंवर दिवाकर सिंह

बहराइच। सूबे की योगी सरकार का जीरो भ्रष्टाचार का संकल्प जिला जेल में शायद लागू नहीं। कतिपय जेल अधिकारियों पर मोदी, योगी का भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था कोई मायने नहीं रखता है। तभी तो जैसा धारा वैसा रेट का फार्मूला जिला जेल में धड़ल्ले से गतिमान है। जेल प्रशासन हाता कटाई के नाम पर बंदियों से अवैध वसूली की जा रही है। इसका खुलासा करते है सैकड़ों वह बंदी जो रिहाई पर बाहर आ चुके है। गौरतलब हो कि जो नये व्यक्ति जेल में जाता है उसे जेल के कोड की भाषा में आमदनी कहते है। इन्हीं नवीन बंदियों से हाता कटाई के नाम पर अवैध वसूली के दास्ता का दौर शुरू होता है। यू ंतो जेल भीतर और मुलाकाती हेतु पर्ची कार्यालय पर फ्लेश बोर्ड लगे है जिसमें साफ-साफ लिखा है कि शुरूवाती दस दिनों तक बंदियों से कोई काम नहीं लिए जायेगे परन्तु सच्चाई के आलोक में यह इबारत मिथ्या और कोसों दूर है। जेल से रिहाई पाये सैकड़ों बंदियों से बातचीत में उनका दर्द छलक आया। जुबान खुली तो जेल के भीतर के भ्रष्टाचार में अवैध वसूली का सच सामने आया। जब कोई नया बंदी जेल के भीतर प्रवेश करता है तो उसे दस दिनों तक मुलहिजा बैरक में रखा जाता है। रात कटने के बाद प्रातः जब गिनती के लिए बैठाया जाता है तो सिपाही का पहला सवाल किसका-किसका हाता नहीं कटा है वह जोड़े से बाहर आ जाय। जिस बंदी का हाता नहीं कटा होता है उसे तुरन्त काम पर लगा दिया जाता है। उन्हीं में से आठ दस बंदियों को कैन्टीन में काम करने हेतु भेज दिया जाता है। कैन्टीन जेल प्रशासन स्वयं चलवाता है। कुछ के जेब में कुछ है तो उसे फौरी अल्प राहत देकर घर से मुलाकाती आने तक मोहलत देकर काम से आजादी दे दी जाती है। जिसकी जेब भारी उसे काम की आजादी। जिसकी जेब खाली उसके काम पर जाने की निश्चित बारी। रिहाई पाये बंदियों का एक जैसा जवाब! हाता कटने का मतलब काम से निजात। जेल के कतिपय हुक्मरानों द्वारा बंदियों के हाता कटाई तीन श्रेणी में क्राइट ऐरिया बना रखे है। पन्द्रह सौ, पच्चीस सौ और सात हजार पांच सौ। यह व्यवस्था छोटे बडे केस के हिसाब से निर्धारित किए गए है। इस अवैध वसूली की व्यवस्था न तो किसी कानून के किताब में है और न ही जेल मैनुवल में। योगी, मोदी, शासन, सरकार, मानवाधिकार के जीरो भ्रष्टाचार मुक्त देश प्रदेश के संकल्प में शुमार है लेकिन उनका यह संकल्प जेल के भीतर वजूद विहीन है। इतना ही नहीं जेल के भीतर गए शांतिभंग व्यवस्था तथा वारंट में जेल गए बंदियों पर भी लागू होता है। जेल में आमद बंदी के संताप, लाचारी, गरीबी, अवसाद, असहज के प्रति जेल हुक्मरानों की कोई मानवीय संवेदना नहीं होती है। उन्हें तो सिर्फ आमद से आमदनी की जरूरत होती है जो पूर्णतयाः महापाप ही नहीं बल्कि कानून के किताब में यह कृत्य अक्षम्य अपराध भी है। बंदी के घर के परिजन, हित, मित्र, रिश्तेदार, नातेदार पहली मुलाकात के लिए आते है तो बंदी जेल व्यवस्था की दुहाई देते हुए सबसे पहले हाता कटाई के लिए धनराशि की मांग करता है। यदि मुलाकाती निर्धारित धन उसके पास नहीं होता है तो दूसरे मुलाकात में जरूर लाकर देता है। हां कुछ के परिजन आर्थिक विपन्नतावश हाता कटाई के रूपयों का बन्दोबस्त जुगत नहीं कर पाता है तो उसके बंदी को भण्डारखाने समेत अन्य कठोर के काम पर लगा दिया जाता है। जेल में हुक्मरानों के इस अवैध वसूली को लेकर जेल के भीतर बंदी के अधिकार के होर्डिंग के इबारत स्लोगन सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश के संकल्प अपने वजूद खोजने में नाकामयाब है। इतने होने के बावजूद भी जेल अधिकारियों के दहशत के आगे बंद बंदी अपनी जुबान खोलने के लिए लाचार है क्योंकि ऐसा करने पर उसके लिए गुमटी गिरदा और गल्ला गोदाम की त्रासदी है। यह तीनों स्थान ऐसे होते है जहां बंदियों को यातनाएं दी जाती है। गल्ला गोदाम में तो कैमरा न होने के कारण इनके ऊपर निर्ममता से अमानवीय जुल्म ढाये जाते है। इस संबंध में जब संवाददाता द्वारा जेल अधीक्षक से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि जो कैदी जेल से रिहा होकर गए है वह झूठ बोल रहे है। लेकिन जेल अधीक्षक यह भूल गए कि रिहाई पर गए बंदियों की संख्या सैकड़ों से ऊपर है। क्या वे सब के सब झूठ बोल सकते है। जो यक्ष प्रश्न है।

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