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: डीएम मोनिका रानी, एसपी वृंदा शुक्ला का प्रयास, जन मानस का लौटा फिर विश्वास

बी.एस.परिहार/कॅंुवर दिवाकर सिंह
बहराइच। बीते 13 अक्टूबर को रेहुवा मंसूर की दुर्गा मां प्रतिमा गाजे बाजे के साथ गौरिया घाट विसर्जन के लिए ले जाई जा रहीं थीं। बीच रास्ते महाराजगंज में मजहबी विवाद हो गया। जिससे मुस्लिम पक्ष की गोलीबारी में रेहुआ मंसूर का 22 वर्षीय युवक रामगोपाल मिश्र की हत्या हो गई। मृतक की शादी अभी चार माह पूर्व हुई थी। इसके बाद सांप्रदायिक दंगे ने रंग ले लिया। इस अप्रत्याशित घटना की कल्पना भी किसी को नहीं थी। सांप्रदायिक दंगा अपना विस्तार अथवा विशाल रूप धारण कर लेगा। हालात बेकाबू बदतर खौफनाक भयावह हो पाए उसके पहले ही डीएम मोनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला दो प्रशासनिक वीरांगनाओं ने अपने सधे अंदाज में अनुभवी जोहर का लोहा मनवाने हेतु जान जोखिम में डालकर क्षेत्र रक्षण के समर में कूद गई। लाव लश्कारों को मोबाइल पर जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए मौके पर मोर्चा संभाल लिया। संचार क्रांति के युग में सोशल मीडिया और मोबाइल सेटों से लोग अपने-अपने ढंग से घटना की संबंध में प्रसारित कर साझा करते रहे जो पुलिस एवं जिला प्रशासन की दुश्वारियां बढ़ाते रहे। हालांकि समय से जनपद की इंटरनेट सेवाएं प्रशासन द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया। दोनों समुदायों के बीच पान पर आक्रोश प्रतिशोध और खूनी संघर्ष के स्क्रिप्ट के बीच डीएम एसपी दोनों वीरांगनाएं आपसी सौहार्द कायम रखने के लिए हाई रिस्क लेकर दिन रात एक साथ भागीरथी प्रयास करती रही। डीएम, एसपी ने बल प्रयोग के इतर संवाद प्रगाढता को ज्यादा परवान चढ़ाया। हालांकि बाहर से आए चार आईपीएस 4 से 5 कंपनी पीएसी के अतिरिक्त गैर जनपदों से आई पुलिस बलो नें अपना बखूबी फर्ज निभाने में कामयाब रहे। इस दौर की घटना और क्रम में जन मन की भाओं में अनिश्चितता संशय से उमड़ घुमड़ कर संताप की ताप में तप रहा था उसे खण्ड खंड-खंडित करने के लिए जिले की इन द्वय मोनिका रानी, वृंदा शुक्ला वीरांगनाओं ने आपसी सौहार्द अमन चैन सलामती के हित में इतनी गहरी योजना की नींव रखी फलतः धार्मिक उन्माद, प्रतिशोध, उग्रता से उक्त विषय परिवेश में आपसी सौहार्द संवेदना की अकल्पित स्थल पर ला खड़ा किया। उत्पन्न हालात के क्षेत्र विषय रक्षण में मोनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला के वैयक्तिता का गहरा स्पर्श दिखाई दिया जो परिस्थितियों के अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित तथा मर्म स्पर्शी बन गईं। इन द्वय की भागीरथी प्रयासों से फलित शांति व्यवस्था व एकरूपता सम्यक समावेश और अखंडित परंपरा का चक्षुदर्शी जीवंत प्रवाह दिखाई दिया। इनके लोक हितार्थ तरंगों में इनकी आला करित चेतना स्पष्ट रही। साथ-साथ आयायत्व की धाक रही और समुज्ज्वल उपमा प्रसफुटित हुई। घटना के बाद उपज रहे हालात पर बखूबी काबू की जौहर विधा देखने को मिली। इससे स्पष्ट हुआ कि इन द्वय के लोक हितार्थ वैचारिक क्रांति जो दृढ इच्छा शक्ति छिपी रहती है वह तोप, तलवार और बम के गोलों में भी नहीं पाई जा सकती है। इसके विषय प्रतिपादन में वैचारिक तारतम्य और अतल गहराइयों की गंभीरता है जो इनके उपादान का उत्पादन है।


रार नहीं ठानी और हार नहीं मानी
भारत शिरोमणि दिवंगत प्रधानमंत्री कवि हृदय सम्राट अटल बिहारी वाजपेई की जन-जन की चिर परिचित पंक्तियां ‘‘रार नहीं ठानेंगे. हार नहीं मानेंगे ‘‘13 अक्टूबर की घटना पर गांधीवादी डीएम मोनिका रानी तथा लक्ष्मी बाईवादी एसपी वृंदा शुक्ला के सामने 13 अक्टूबर से लेकर 16 अक्टूबर के मध्य ऐसी परिस्थितियों उत्पन्न हो गई जो शिखर की सर पर सवार धैर्य की परीक्षा लेने को आतुर थी। नाना प्रकार की मानसिक द्वन्द और विपरीत परिस्थितियों में भी डीएम, एसपी को असहज नहीं कर सकी। आत्मविश्वास से लबालब लवरेज मोनिका रानी तथा बृंदा शुक्ला के चट्टानी मानसिक पटल पर बस एक ही धैर्य का धुन गुनगुना रहा था कि ‘‘रार नहीं ठानेगे हार नहीं मानेंगे‘‘ इस हिट फार्मूले ने सौहार्द की बैतरनी पार करने में सेतु की भूमिका का निर्वहन किया जो जनपद की स्वप्निल सौहार्द में पत्थर की लकीर साबित हुई।


मानवीय संवेदना में सराबोर रहे विधायक सुरेश्वर सिंह
विधायक सुरेश्वर सिंह के परिवार का भाजपा राजनीति से गहरा संबंध है। बावजूद इसके इनके अथवा उनके कुटुंब के दामन पर सांप्रदायिकता के दाग कभी नहीं लगे। इनकी राजनीति गंगा जल जैसे स्वच्छ साफ सुथरी जो किसी से छिपी नहीं। सुरेश्वर सिंह कड़क मिजाज और तुनक स्वभाव के धनी हैं। कड़क-धड़क मिजाजी जितना ऊपर से कठोर दिखते हैं उतना आंतरिक में होते नहीं है। सुरेश्वर सिंह भी अंदर से निहायत उदार निश्चल और दरिया दिल हैं जो उनके करीब है वह इस बात को जानता है। उनके अंतर मन में नौ जागरण की प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है। उनकी हर लोक हितार्थ कार्यों में इनके वैभव और शौर्य का प्रदर्शन करता है। जैसे ऐसे मजे मजाये राजनीतिक पंडित हैं जो अपने चश्मे से उसमें उसी प्रकार राष्ट्रीयता ढूंढ निकालते हैं। जिस प्रकार एक पंडित वर्ग वेदों में वायुयान निर्माण कर विद अन्वेषित कर लेता है। महाराजगंज की घटना ने हीं इन्हें अंदर से तोड़ दिया जब मृतक राम गोपाल मिश्रा के अंतिम संस्कार की बात रही हो या फिर जनपद में रुकी मूर्तियों का विसर्जन रहा हो। जिसको लेकर जिला प्रशासन अत्यधिक चुनौती और दबाव में था तो सुरेश्वर सिंह जिला प्रशासन का संकट मोचन बनकर वह राम गोपाल मिश्रा के शव का दाह संस्कार कराने एवं रुकी हुईं मूर्तियों के विसर्जन में इन्होने सेतु बंध रामेश्वर की भूमिका का निर्वहन किया। मृतक परिजनों को योगी के अग्रदूत के रूप में मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई। इनका निश्चल कार्य का अपना महत्व होता है।


हरदी थाने के पंडाल में शिरकत की हिंदू और मुसलमान
जिलाधीश मोनिका रानी तथा एसपी वृंदा शुक्ला 23 अक्टूबर को थाना हरदी परिसर के भव्य पंडाल में शांति समिति की एक बैठक आयोजित किया। पंडाल में लगे बैनर में डीएम और एसपी के चित्र भी छपे थे। नियत समय पर शांति समिति की बैठक में क्षेत्र के हिंदू और मुसलमानो ने शिरकत कर सफल बनाया। पंडाल में आगंतुकों के लिए लगी कुर्सियों में कोई भी भेद नहीं था एक साथ बगैर किसी दूरी बनाए सभी लोग आपस में बैठे रहे। डीएम व एसपी की शांत उद्बोधन पर दोनों पक्षों ने सहर्ष हामी भरी और अपनी सहमति जताई। आपसी सौहार्द बनाए रखने का हर संभव तहे दिल से संकल्प लिया। प्रशासन शांति समिति बैठक के बहाने दो वर्गों का मिजाजी नब्ज टटोलने की कोशिश की जो सफल रही।

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