: योगी सरकार की सच्ची संवाहक डीएम मोनिका रानी
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Thu, Feb 29, 2024
बी.एस.परिहार/कुंवर दिवाकर सिंह
बहराइच। सौम्य और सभ्यता से ओत प्रोत मोनिका रानी ने मई 2023 को बतौर जिलाधीश के बहराइच का बागडोर सम्हाला। कहना बेजा कदापि नहीं होगा कि उन दिनों जिले के प्रशासनिक अमलों के जनहित काम-काज का तरीका बहुत कुछ ठीक नहीं था। सरकारी अमले में सार्थक अंकुश और कर्तव्य परायण समर्पण का आभाव था। जनहित से जुड़ी कई स्वप्निलकारी योजनाएं वे ढर्रे वे पटरी पर चित थी। जन दर्शन में फरियादियों की लम्बी फेरहिस्त होना सामान्य बात थी। बार-बार फरियादों के बावजूद उनकी मौलिक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता था। इसके पीछे राजा की लचर व्यवस्था अथवा अन्य और जो कारण रहे हो। जिलाधिकारी मोनिका रानी की जीवन की प्राथमिक पृष्ठ भूमि हरियाणवीं थी। जहां की सोधी माटी में भड़क भाषा का समागम है। लेकिन मोनिका रानी ने यहां दीन-हीन और शोषितों के प्रति पल्लवित विकल पीड़ा को समझा ही नहीं बल्कि समाधान में प्रतिफलित घुटन और समस्याओं के प्रति तत्क्षण, बगैर लाग लपेट के की साधना का अविरल संचार किया। उनका समाज दर्शन अथवा आदर्श समाज विषयक ठोस यर्थात का आधार लेकर खड़ी है। पंक्तिवद्ध अतिशियोक्ति कदापि नहीं होगा कि इनकी वाणी जन श्रुतियां बनकर जन-जन के मानस पटल पर गहरी छाप छोड़ी। केन्द्र एवं राज्य के स्वप्निल कार्य योजनाओं के साकार होने के लिए फैलादी पंख पखेरन में असीमित यर्थात उर्जा का संचार किया। मोनिका रानी ने सरकार द्वारा संचालित जनहित योजनाओं को सुचितापूर्ण परवान चढ़ाने के लिए स्वयं तो शंखनाद किया ही अपितु मातहतों को भी उनके नैतिक दायित्वों का सहज बोध कराया। जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। जिलाधिकारी मोनिका रानी को बखूबी मान है कि जनमानस उनसे क्या अपेक्षा रखती है। विकास की योजनाएं अपने अंतिम पड़ाव पर कैसे पहुंचेगी। लोक हित में अपनी महती भूमिका को निर्वाध गति व पूर्ण उर्जा, ईमानदारी से निर्वहन करने में कोई कोताही नहीं बरत रही है। मोनिका रानी का कठोर परिश्रम व सतत् सहयोग की सुखद प्रकाश पुंज नये सबेरे के साथ धरातल पर दिखाई दे रहा है। वे सामाजिक चेतना से ओतप्रोत दूर दृष्टा प्रशासक है उनकी चिन्तन धारा आम जन मानस में प्रासंगिक है और रहेगी भी।
डीएम मोनिका रानी ने शिक्षा, चिकित्सा को चढ़ाया सार्थकता का परवान
आम जनमानस के अंर्तमन में पूर्णवास किया हुआ है कि विशेषकर गांव देहात के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गुणवत्ता का अकाल है। स्कूल के बहुधा कतिपय शिक्षक जो योगदान और अपने कर्तव्य श्री का प्रदर्शन कर रहे है वह नाकाफी है। चिकित्सा में उन्हें जो फौरी उपचार, सुविधा की दरकार होती है वह नहीं मिल पाता है। जबकि सरकार जनता के शिक्षा, चिकित्सा पर खुले हाथों लाखों अरबो साल में ऊलच रही है। लेकिन कोई जिलाधिकारी ने इस विकराल समस्याओं के पूर्ण निराकरण के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किए। इस अधकचरे कुव्यवस्था से जनमानस सदैव आहत रहा। लेकिन जिलाधिकारी मोनिका रानी वर्ष 2010 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने से पूर्व एक सुशील शिक्षिका रही। शिक्षा के मर्म व धर्म का उन्हें बाखूबी ज्ञान था। अपने अनुभव और जन आकांक्षाओं को साकार करने के लिए पटरी से उतरी शिक्षा चिकित्सा मिशन को सचमुच साकार करने के लिए पूर्ण प्रण रण से संकल्पित हुई। स्कूलों का अचानक निरीक्षण किया। नौनिहालों के बौद्धिक क्षमता का परीक्षण कर परखा। गुरूजनों को उनके कर्तव्य बोध को सुरूचिपूर्ण परवान चढ़ाने का सीधा और सख्त लहजे में आदेश दिया। शिक्षा मिशन में कोताही, लापरवाही तथा दृढ़ता को अक्षम अपराध घोषित किया। नकारात्मक प्रदर्शन को मोनिका रानी ने संवेदना की न की श्रेणी में सुमार किया। नौनिहालों को मिलने वाले स्कूल में भोजन की खराब गुणवत्ता पाये जाने की स्थिति में सम्बन्धित के विरूद्ध कठोर कार्रवाई किये जाने का भी एलान किया। मोनिका रानी ने चिकित्सा उपचार की कमी को भी बहुत गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिया कि प्राथमिक उपचार में चिकित्सकों द्वारा कोई कोताही न बरती जाये। देहात, कस्बो, तहसील तथा ब्लाक स्तर पर संचालित चिकित्सालयों में न तो औषधियों की कमी हो और न ही चिकित्सकीय उपकरण का। सरकार के मंशा व निर्देशों का पूरा-पूरा पालन किया जाये। यदि किसी बीमार की जान औषधि के आभाव में गई तो जांचोपरान्त दोषी पाये जाने की स्थिति में उक्त मुलाजिम के विरूद्ध अपराधिक परिधि में कठोर कार्रवाई होगी। डीएम मोनिका रानी के इस सतत प्रयासों के चलते शिक्षा और चिकित्सा सेवाएं खुद ब खुद पटरी पर गतिशील हुई।
जन समस्या समाधान में भी डीएम अव्वल
समस्याओं से ग्रस्त जब जन निराश होता है तो जनपद में उसकी अंतिम आश का प्रकाशपुंज जिलाधिकारी होता है। समस्या समाधान के लिए घर से जब फरियादी डीएम से मिलने की आश लिए चलता है तो उसके अन्तःकरण में एक अटूट भरोसा व विश्वास होता है कि डीएम साहब उसकी समस्या को जरूर हल कर देगे। लेकिन डीएम के दरबार से उसे जब अधूरा अथवा अपूर्ण न्याय मिलता है तो उसकी मार्मिक वेदना का थाह लगाना भूरे में सुई खोजने सरीखी हो जाती है। डीएम साहब ने तो फरियादी की विनती पर कार्रवाई के लिए सम्बन्धित विभाग को लिख तो देते है परन्तु किन्तु के पालने में उसकी समस्या झूलती ही रहती है। एक दो बार डीएम साहब के पास अर्जी लगाने के बाद फरियादी को अपेक्षित न्याय नहीं मिलता है तो फिर मन मसोस कर भाग्य के भरोसे बैठ जाता है अथवा कोट कचेहरी की ओर रूख करता है। जिलाधिकारी मोनिका रानी की कार्यशैली अन्य जिलाधिकारियों की अपेक्षा कुछ अलग ही है। इनकी वास्तवित अवधारणा त्वरित न्याय, निष्पक्ष न्याय और निशुल्क न्याय का है। इनका यही प्रयास रहता है कि फरियादी दुबारा यह फरियाद लेकर उनके समक्ष दोबार प्रस्तुत न हो कि उसके मौलिक समस्या के समाधान में सम्बन्धित मुलाजिमों ने कोई रूचि नहीं लिया या फिर फालतू पेंच फंसाकर प्रार्थना पत्र को ठण्डे बस्ते में डाल दिया। वे स्वयं समाधान दिवसों में प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर किये गए कार्रवाई और समाधान की समीक्षा करती है। फलतः फरियादियों को पूरा समाधान मिलने लगा। मोनिका रानी फरियादियों के छवि पटल में किसी फरिश्ते से कम नहीं।
बहराइच महोत्सव की छंटा रही निराली
जन सार्थक साक्षी मोनिका रानी ने मोदी एवं योगी सरकार के स्वप्निल योजनाओं को बड़ी शिद्दत से साकार कर परवान चढ़ाया। मोनिका रानी के कुशल निर्देशन तथा नेतृत्व में तीन दिवसीय बहराइच महोत्सव को नेपथ्य तक पहुंचाया। प्रदेश के अन्य जनपदों में आलादीन चिराग तले खोजने में भी ऐसी महोत्सव की झांकी दिखायी नहीं देगी। बहराइच महोत्सव मे उमड़ी भीड़ में बालक, तरूण, वृद्ध का साहसिक उत्साह, उर्जा, मनोहारी दृश्याअभिराम मिथक को तोड़ती हुई नई परिपाटी व्यवस्था का संजीव उद्धरण की प्रमुख नायिक डीएम मोनिका रानी ही है। जिनके भगीरथी प्रयासों से बहराइच महोत्सव क्षितिज की दहलीज पर स्वर्णाक्षरों में इतिहास रचा। निःसंदेह न भूतो न भविष्यों। इस मनमोहक बहराइच महोत्सव की छटा इतनी छबीली और निराली थी कि चक्षुपात करते ही बनता था। वहीं इस महोत्सव की सफलता द्वापरकालीन संजय की तरह मोनिकारानी दृष्टपात करती रही। गदगद आम जनमानस को लगा कि योगी सरकार वास्तव में अलौकिक और अनूठी है।
नीति आयोग भी कायल हुआ डीएम मोनिका रानी का
सार्थक जनकल्याण योजनाओं को धरातल पर साकार होते देख नीति आयोग पूर्ण मनोयोग से डीएम मोनिका रानी के साथ हो गया। लोकहित योजनाएं पूरी होने में विलम्ब अवरोध अथवा धन के आभाव में ग्रहण न लगे इसके लिए नीति आयोग सम्यक विचारोंपरान्त कई करोड धन का आवंटन कर मोनिका रानी पर पूरा भरोसा जताया। नीति आयोग के हुक्मरान और डीएम मोनिका रानी से विकास विकसित करने के मुद्दे पर कई चक्रों पर वार्ता हुई। जो साकारात्मकता का परिणाम रहा। मोनिका रानी ने सड़कों का चैड़ीकरण, सौन्दर्यीकरण, शहर विकास, लखनऊ हाईवे से पीडब्लूडी गेस्ट हाउस तक सड़क चैड़ीकरण, हुजूरपुर विकास खण्ड के स्कूलों के कायाकल्प हेतु 3 करोड़ से गुणवत्तायुक्त विकास कार्य का बीड़ा उठाया। डीएम साहिबा के प्रयास से भारत-नेपाल सीमा औद्योगिक हब 100 एकड़ में पूर्ण करने की योजना को अंतिम रूप मिला। इस औद्योगिक हब के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए सरकारी खजाने से 3 करोड़ अवमुक्त भी किए जा चुके है। डीएम के ही सार्थक प्रयासों का परिणाम रहा कि भारत-नेपाल मैत्री गेट के लिए शासन से 2 करोड़ रूपयों का सौगात मिला। योगी के मंशानुक्रम में मोनिका रानी द्वारा स्वदेशी, विदेशी पर्यटकों को रिझाने के लिए व पर्यटन विकास को बढ़ाने के लिए पर्यटकों को सुख सुविधा हेतु एक अत्याधुनिक रिजार्ट के साथ हेलीपैड कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में बनाने की तैयारी अमलीजामा का अंतिम पड़ाव ले चुकी है।
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