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: क्रांतिकारी के स्वतंत्रता आन्दोलन में किए गए योगदान पर की चर्चा

महान क्रांतिकारी शिव वर्मा का जन्मोत्सव मनाया गया
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में महान क्रांतिकारी शिव वर्मा का जन्मोत्सव मनाया गया। सेनानी उत्तराधिकारीगणों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि क्रांतिकारी शिव वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में हुआ था। साहित्य प्रेमी होने के कारण मार्क्सवाद से प्रभावित होकर वह साम्यवादी हो गये। उन्हें काला पानी सहित लगभग 17 वर्ष की सजा सुनाई गई। लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सरकार के सामने नतमस्तक नहीं हुए। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि क्रांतिकारी शिव वर्मा 1921 में 17 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता आन्दोलन में कूदे, वह हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। 13 मई 1929 को सहारनपुर बम फैक्टरी में जयदेव कपूर और डॉ गया प्रसाद कटियार के साथ शिव वर्मा गिरफ्तार हुए और 1946 में वें जेल से रिहा हुए। वरिष्ठ सेनानी उत्तराधिकारी भानुप्रताप द्विवेदी एडवोकेट ने कहा कि उनकी धारणा थी कि बुलेट के साथ बुलेटिन की भी इस आंदोलन में प्रबल आवश्यकता है और वैचारिक क्रांति के सहारे स्वतंत्रता की तरफ बढ़ा जा सकता है। भगतसिंह के सच्चे मित्र होने के कारण वह डटे रहे इसी कारण लाहौर षड़्यंत्र केस-2 में उन्हें दण्डित किया गया। उनकी मृत्यु 10 जनवरी 1997 को कानपुर में हुई। सेनानी उत्तराधिकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी वह क्रांतिकारी एवं साम्यवादी विचारों के लिए विख्यात थे और तमाम नौजवानों के लिए आज भी मृत्युपरांत वह प्रेरणा स्रोत हैं। अन्त में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। कार्यक्रम में राजेश वोट एडवोकेट, आशुतोष मिश्रा एडवोकेट, अभिषेक द्विवेदी एड, अवनीन्द्रनाथ पाण्डेय एडवोकेट सहित तमाम सेनानी उत्तराधिकारी मौजूद रहे।

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