संपूर्ण भारत में चंद्र ग्रहण कलः आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री : बच्चों, वृद्धों तथा रोगियों पर सूतक के नियम लागू नही होते, ग्रहण के बाद स्नान कर चंद्रमा को दे अर्घ्य
Kunwar Diwakar Singh
Sat, Sep 6, 2025
बहराइच। भाद्रप्रद शुक्ल पूर्णिमा 7 सितंबर की रात्रि में चन्द्र ग्रहण लगेगा। जिससे भारत भूमि से देखा जा सकेगा। भारत के अतिरिक्त इस ग्रहण को पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, हिंद महासागर, यूरोप आदि जगह भी देखा जाएगा। जहां उदयानुसार चन्द्रमा आकाश में दिखाई देगा। खग्रास चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार 7 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट से अर्धरात्रि 1 बजकर 27 मिनट तक दृश्यमान होगा। भारत में चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट से रात 11ः41 पर ग्रहण मध्य में पूरा बिम्ब पृथ्वी की छाया से ढ़का (खग्रास ग्रहण) होगा। खग्रास चंद्रग्रहण रात 11 बजे से 12ः23 तक देखा जा सकता है। ग्रहण की समाप्ति रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगी। महावीर पञ्चाङ्ग के अनुसार यह ग्रहण 09ः57 से 01ः27 तक साढ़े तीन घंटे का होगा। चन्द्रग्रहण का सूतक 9 घण्टे पूर्व व सूर्यग्रहण का सूतक 12 घण्टे पूर्व लगता है। इस ग्रहण का सूतक दोपहर 12ः57 पर लग जाएगा। 7 सितंबर को ही पितृपक्ष आरंभ हो रहा है। अतः जिन्हें तर्पण अथवा श्राद्ध आदि करना है वह दोपहर 12 बजे से पूर्व ही समस्त कार्य संपन्न कर ले। मंदिर के कपाट भोग लगाकर दोपहर में ही बंद कर दिए जाएंगे जो ग्रहण के उपरांत ही खुलेंगे। सूतक काल में मंदिर में प्रवेश करना, मूर्ति को स्पर्श करना, भोजन व यात्रा करना वर्जित है। बालक वृद्ध एवं रोगी अति आवश्यक होने पर पेय पदार्थ ले सकते हैं। भोजन सामग्री जैसे दूध, दही, घी आदि में कुश अथवा तुलसी पत्ता रख देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के उपरांत पीने का ताजा पानी ग्रहण करना चाहिए। इस कार्यकाल में लोगो को चाहिए कि किसी तीर्थ, नदी जलाशय पर स्नान कर जप, तप, भगवन्नाम संकीर्तन करें। गर्भवती स्त्रियों को चाहिए कि अपनी गोद में ग्रहण के समय नारियल गोला फल रखें तथा नाभि में देशी गाय के गोबर का लेप करें, भगवन्नाम जपे। नारियल अगले दिन मंदिर में जाकर चढ़ाएं या नदी में प्रवाहित करें। ग्रहण काल मे भोजन, सोना तथा अन्य समस्त कार्य वर्जित हैं। केवल जप साधना भवन्नाम जप ही करना चाहिए। खाद्य सामग्री में कुश या तुलसी पत्र रखने से वो पवित्र रहती है। बच्चों, वृद्धों तथा रोगियों पर सूतक के नियम लागू नही होते। ग्रहण के बाद स्नान कर चंद्रमा को अर्घ्य दें। भोजन अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें।
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