: भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना…….
Admin
Tue, Aug 20, 2024
हर्षोल्लास के साथ जिले में मनाया गया रक्षाबंधन का पर्व
बहनों ने भाईयों के कलाई पर राखी बांधकर की दीर्घायु की कामना
बहराइच। परम्परा के मुताबिक सोमवार को जिले में रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बहने व्रत रखकर दोपहर बाद से ही भाईयों के कलाई पर राखी बांधने के लिए पूजन-अर्चन में जुटी रही। दोपहर से जो राखी बांधने का सिलसिला २ाुरू हुआ वह सायं तक जारी रहा। बहनों ने थाल सजाकर भाईयों की आरती उतारकर अक्षत, रोली, चंदन से तिलक कर अपने आंचल से भाईयों का सिर ढकते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधकर अपना फर्ज अदा करते हुए उनके दीर्घायु की कामना की और मिठाई खिलाकर मुंह मीठा किया। बहनों ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए जन्म जन्मान्तर तक भाई-बहन के रिश्ते का प्यार बरकरार रखने की अभिलाषा व्यक्त की। वहीं भाईयों ने बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किये। नेपाल सीमा से सटे रूपईडीहा से लेकर जरवलरोड और विशेश्वरगंज से लेकर सुजौली तक विभिन्न कस्बों में दुकाने सजायी गई। मिठाई और राखी की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। परम्परा के मुताबिक रक्षाबंधन भारतीय सभ्यता का प्रमुख पर्व है। जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षाबंधन बहन और भाई के बीच विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षासूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा का वचन ही नहीं लेता बल्कि एक दूसरे के प्रति प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के माध्यम से हृदयों को जोड़े रखने का प्रण करता है। प्राचीन काल में आयु और आरोग्य की वृद्धि के लिए किसी को भी राखी बांधी व भेजी जाती थी। इतिहास में राखी की मर्यादा रानी कर्मावती व हुमायू के बीच रक्षाबंधन पर राखी बांधने के बाद काफी चर्चित रही। राखी का सर्वप्रथम उल्लेख पुराणों में प्राप्त होता है। इन्द्र की निराशा के बाद गुरू वृहस्पति के दिशा निर्देश पर रक्षा विधान के लिए इन्द्राणी ने श्रावण पूर्णिमा पर सभी देवताओं की कलाई पर राखी बांधकर युद्ध में इन्द्र के विजय के लिए सहयोग मांगा था। एक बार देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर भी राखी बांधकर अपनी रक्षा की थी। सीमा पर जवान तो खेतों में किसानों ने भी राखी बंधवाकर राष्ट्र रक्षा का संकल्प लिया।
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