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: धधकती आग से जंगली पेड़ों व वन्य जीवों पर गहराया संकट

दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मडराने लगा
जंगली क्षेत्र में बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से पर्यावरण विद चिन्तित
जंगलों की सुरक्षा आग से कैसे हो यह यक्ष प्रश्न बना
विभागीय कर्मी संसाधन के अभाव में आग पर त्वरित काबू पाने में अपने को असहाय पा रहे

शेर सिंह कसौधन
रुपईडीहा, बहराइच। तराई इलाकों में धधकती अग्नि ज्वाला की चपेट में आकर असंख्य जंगली वृक्ष के साथ ही नवजात वृक्षों का विनास भी तेजी से हो रहा है। साथ ही यहाँ के जंगलों में पायें जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है। विभागीय कर्मियों के तमाम मुस्तैदी के बावजूद आये दिन जंगली क्षेत्र में बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से पर्यावरण विद चिन्तित नजर आ रहे हैं वहीं विभाग के उच्चाधिकारी पर्याप्त संसाधन अनुपलब्धता से हताश हैं। ऐसे में तराई के जंगलों की अग्नि से सुरक्षा पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं। जंगलों की सुरक्षा आग से कैसे हो यह यक्ष प्रश्न बन गया है। जनपद के भारत नेपाल सीमावर्ती इलाकों में शताब्दियों से बेशकीमती जंगली क्षेत्र बहुतायत में पाया जाता रहा है। बहराइच वन प्रभाग अन्तर्गत अब्दुल्लागंज, चकिया, रुपईडीहा वन्य क्षेत्र का दायरा लगभग पचीस सौ हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमे दुर्लभ प्राय के साखू, साल, सागौन, समेत जामुन, अर्जुन, सिरसा, कंज, पाकड़, दुडैल आदि प्रजाति के रोहनी बहुतायत में पाये जाते हैं। इन इलाकों में हिरन, सांभर, बारासिंघा, जंगली सुअर समेत तमाम दुर्लभ प्राय के वन्यजीव भी पाए जाते हैं लेकिन गर्मी के शुरुआती दौर से ही यहाँ लगातार आगजनी की बढ़ रही घटनाओं से पर्यावरण विद जहां चिन्तित नजर आ रहे हैं वहीं विभागीय कर्मी संसाधन के अभाव में आग पर त्वरित काबू पाने में अपने को असहाय पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय ग्रामीण अज्ञानता में नए चारा, खर व जंगली फल कटरवा, गरजुवा की ज्यादा फसल उगने के मंसूबे में वन्य क्षेत्र में आग लगा देते हैं साथ ही आसपास के इलाकों में पराली में भी आग लगाते हैं जिसका फैलाव जंगली क्षेत्र में हो जाता है। इससे काफी हद तक जंगली क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। बढ़ रही आगजनी की घटनाओं से चिंतित पर्यावरण विद राकेश चन्द्र श्रीवास्तव व धीरेन्द्र शर्मा का कहना है कि वन्य क्षेत्र में फैलाव के लिये प्रतिवर्ष स्थानीय जनसहयोग से तमाम पेंड लगायें जा रहे हैं। वन विभाग की ओर से भी लगभग करोड़ों रुपए खर्च किये जाते हैं बावजूद इसके बढ़ रही आगजनी की घटनाओं के चलते वन्य क्षेत्र का संकुचन हो रहा है साथ ही दुर्लभ प्रजाति के पाये जाने वाले वन प्राणियों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना हैं कि आगजनी की बढ़ रही घटनाओं पर प्रभावी अंकुश के लिये वन्यक्षेत्र से जुड़े ग्रामीण इलाकों में लगातार जन जागरण अभियान चलाया जाना चाहिए तभी वन्य क्षेत्र के इलाकों में आगजनी पर प्रभावी अंकुश पाया जा सकेगा। प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच संजीव कुमार का कहना है कि वन्य क्षेत्र के खाली पड़े स्थानों पर स्थायी जलभरवाय के लिए तालाब खुदवाये जाने के लिये उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। साथ ही जंगली इलाकों में नालियां व चौक डैम्प बनावाकर वन्य इलाके के कंपार्टमेन्ट में वाटर सिस्टम रेजिंग की दूरगामी व्यवस्था हेतु भी पत्राचार किया गया है ताकि आगजनी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। ग्रामीण इलाकों में अग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए जन जागरण अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि वन्य क्षेत्र व वन्य जीव की सुरक्षा हो सके।

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