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: सामाजिक समरसता में है बाबा साहब का अहम योगदान

सेनानी उत्तराधिकारियों ने मनाई डा.अम्बेडकर जयंती
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में आजादी के महानायक बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 133 वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में सेनानी उत्तराधिकारियों ने बाबा साहेब के स्वतंत्रता प्राप्ति में संघर्ष और सामाजिक समरसता के कार्यों की सराहना की। संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी एडवोकेट ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान और उसका सभी जातियों, धर्मों, वर्गों, सम्प्रदायों, भाषाओं, वेषभूषा में समावेशी होना बहुत बड़ी बात है। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि द्विराष्ट्र वादी शक्तियां डॉ अम्बेडकर को देश विभाजन में अपना हिस्सा लेने को प्रेरित कर रही थी,तब डॉ अम्बेडकर ने उस समय अखण्ड भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया और भारतीय संस्कृति के पोषक और रक्षक बने। संगठन के शहर अध्यक्ष श्री राजू मिश्र उर्फ मुन्ना भैया ने कहा कि डॉ अम्बेडकर बौद्ध संस्कृति के पोषक थे, उन्होंने दलित बौद्ध दर्शन से लोगों को प्रेरित किया। संगठन के महामंत्री आदित्य भान सिंह ने कहा कि डॉ बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने श्रमिकों, किसानों और महिलाओं को शिक्षित करने पर जोर दिया। संगठन उपाध्यक्ष राम दीन गौतम ने कहा कि बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के प्रति भेदभाव के विरुद्ध आन्दोलन चलाया और शिक्षित होकर संगठित होने और संघर्ष करने हेतु प्रेरित किया। संगठन के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ अम्बेडकर के बताए रास्ते पर चल कर हम राष्ट्र सेवा का संकल्प पूरा कर सकते हैं। अन्त में उपस्थित सभी सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके द्वारा भारतीय संविधान के निर्माण पर कृतज्ञता प्रकट करते हुए कार्यक्रम समाप्त किया। इस अवसर पर अधिवक्ता राम रूप मिश्र सहित कई सेनानी उत्तराधिकारी मौजूद रहे।

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