अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गई : आजाद को देश के स्वतंत्रता इतिहास के आकाश में एक ध्रुव तारे की तरह स्मरण किया जाता रहेगा
Kunwar Diwakar Singh
Wed, Jul 23, 2025
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गई। सेनानी उत्तराधिकारियों ने कहा कि उन्हें देश के स्वतंत्रता इतिहास के आकाश में एक ध्रुव तारे की तरह स्मरण किया जाता रहेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी विचार धारा के वे प्रमुख नेता थे। उन्होंने कहा था मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वाधीनता है और मेरा घर जेलखाना है मैं जीवन के अंतिम सांस तक देश के लिए लड़ता रहूंगा-मेरा यह छोटा सा प्रयास ही कल के लिए महान बन जायेगा। संगठन संरक्षक एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद एक निडर क्रांतिकारी के रूप में उनकी प्रतिष्ठा ने उन्हें औपनिवेशिक उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया। चन्द्रशेखर आजाद के ही संगठन हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के सेन्ट्रल कमेटी के मेंबर वीरभद्र तिवारी ने मुखबिरी की, चूंकि आजाद ने संकल्प लिया था कि वह कभी भी जीवित नहीं पकड़े जायेंगे इसलिए पुलिस से घिरा देख कुछ देर तक संघर्ष के बाद उन्होंने खुद के रिवाल्वर से सिर में गोली मार ली। जिस पार्क में उनकी जान गई उसका नाम चन्द्रशेखर आजाद पार्क है। समाजसेवी मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि 15 कोड़ों की सजा से लेकर 27 फरवरी 1931 को उनकी वीरगति प्राप्त करने तक का उनका पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनका 25 वर्ष से भी कम का जीवन स्वतंत्रता आन्दोलन में हजारों युवाओं के प्रोत्साहन का कारण बना। अन्त में उपस्थित सभी देशभक्तों ने उनके संगठनात्मक कौशल और हिंसक विचारों के बावजूद महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले असहयोग आन्दोलन में शामिल होने के लिए उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम समाप्त किया। कार्यक्रम में रामरूप मिश्र, विनय त्रिपाठी, रवि जायसवाल, तिलक राम अजनबी, पवन गौतम सहित तमाम देश भक्त मौजूद रहे।
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