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: स्वतंत्रता आन्दोलन में अशफाक उल्ला खां के योगदान को किया याद

सेनानी उत्तराधिकारियों ने अशफाक उल्ला के अदम्य साहस की प्रशंसा की
अमर क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां की 124वीं जयंती मनाई गई
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में अमर क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां की 124वीं जयंती मनाई गई। सेनानी उत्तराधिकारियों ने स्वतंत्रता आन्दोलन में अशफाक उल्ला खां के योगदान को याद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं संगठन संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के शहीदगढ़ में हुआ था। वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सह-संस्थापक थे। वे बेहतरीन शायर थे और हिंदी अंग्रेजी व उर्दू में कविता लिखते थे। उन्हें घुड़सवारी, निशानेबाजी और तैराकी का का शौक था। काकोरी काण्ड स्वतंत्रता इतिहास की महत्वपूर्ण घटना थी। जो 9 अगस्त 1925 को घटी उसमें शामिल राम प्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह के साथ अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें फांसी दे दी। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि काकोरी काण्ड में 4679 रूपए एक आना और छः पाई लूटी गयी। एक छोटी सी जगह पर हुई इस घटना द्वारा अंग्रेजी शासन को चुनौती देने के अर्थ बहुत व्यापक निकले। देश से बाहर निकलने के तरीके तलाशने के लिए अशफाक उल्ला खां दिल्ली चले गए, उन्होंने अपने एक पुराने सहपाठी पठान मित्र की मदद ली, किन्तु उसने धोखा देकर 17 जुलाई 1926 को अशफाक उल्ला खां को गिरफ्तार करा दिया। अशफाक उल्ला खां को जेल अधिकारी जो उनको बहुत समझाया और माफी मांगने व सरकारी गवाह बनने की प्रेरणा दी, किन्तु अगाध राष्ट्र प्रेम ने उन्हें जीवित रहने से ज्यादा बलिदानी कहलाना उचित समझा। समाजसेवी राम दयाल सिंह ने कहा कि 10 महीने के ट्रायल के बाद इन तीनों क्रांतिकारियों के अतिरिक्त शेष लोगों को काले पानी की सजा सुनाई गई। हालांकि क्रांतिकारियों की तरफ से गोविन्द बल्लभ पन्त और चन्द्र भानु गुप्ता ने भरपूर पैरवी की। अन्त में सेनानी उत्तराधिकारियों ने अशफाक उल्ला खां के अदम्य साहस की प्रशंसा करते हुए और उनके देश प्रेम को प्रणाम करते हुए कार्यक्रम समाप्त किया गया। कार्यक्रम में राजीव कुमार सिंह, जसवंत कुमार, सूफियान अली सहित तमाम देश भक्त मौजूद रहे।

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