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: एएनएम जान जोखिम में डाल लगा रहीं जिंदगी का टीका

नैया पार ले चलो खेवैया, टीकाकरण को जाना है
बहराइच। जानलेवा बीमारियों से बचाव में टीका बेहद अहम माना जाता है। जनपद के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दूरस्थ गांवों में टीकाकरण करना आसान नहीं है। भानमती यादव और पुष्पा देवी जैसी स्वास्थ्यकर्मी जान जोखिम में डालकर महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को टीका लगा रही हैं। कहीं विषैले जानवरों का डर है तो कहीं गहरे पानी में फंसने का, लेकिन इनके उत्साह में कोई कमी नहीं है। भारत-नेपाल सीमा से सटे बहराइच जिले के 232 गांव ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए नदी-नालों को पार करना पड़ता है। वर्षाकाल में जल भराव के कारण पानी से ढके फिसलन भरे कच्चे रास्तों, नदी-नालों, जंगल-झाड़ियों और विकट पगडंडियों से होकर हेल्थवर्कर गांवों तक पहुंच रहे हैं। जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर चौकसाहार और बेलामकन गांव जाने के लिए सीएचसी शिवपुर से 7 से 8 किमी का रास्ता नदी पार कर तय करना पड़ता है। बाढ़ग्रस्त इन इलाकों में एएनएम भानमती यादव और पुष्पा देवी टीकाकरण के लिए कई बार जा चुकी हैं। पुष्पा देवी बीती 14 जुलाई को सुबह आठ बजे रवाना हुईं। चौकसाहार से एक किमी पहले नदी पार करने के बाद कच्चे रास्ते पर जल भराव के कारण सड़क बंद थी। ऐसे में जैसे-तैसे रास्ता पार कर 18 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया। पुष्पा बताती हैं कि हर साल बाढ़ के कारण गांव के कई परिवार दूर-दूर छोटी-छोटी बस्तियों में बस गए हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में कच्चे और कीचड़ वाले रास्तों से उन तक पहुंचना और भी कठिन हो जाता है। घर और खेत सैलाब में कट जाने की वजह से ग्रामीणों को वैक्सीनेशन के लिए राजी करना थोड़ा मुश्किल होता है। जानकारी के मुताबिक चौकसाहार गांव में टीकाकरण के लिए एएनएम पुष्पा देवी अपनी दो बेटियों से दूर रहती है एक बेटी नाना-नानी के साथ मऊ जिले के मधुबन गांव में रहती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संजय कुमार शर्मा ने बताया कि डीएम मोनिका रानी के निर्देश पर जनपद में संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों अन्तर्गत 07 ब्लाकों के 232 गांवों में अब तक 1132 गर्भवती महिलाओं और 2300 बच्चों का टीकाकरण कर 90 फीसदी से अधिक लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। साथ ही इन इलाकों की सभी गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि भी अंकित कर ली गई है ताकि सही समय से सुविधाएँ मुहैया कराकर अस्पताल में प्रसव कराया जा सके। सीएमओं ने बताया कि स्वास्थ्य टीमों को टीकाकरण के लिए बाढ़ ग्रस्त स्थानों पर भी जाना पड़ रहा है, जहां पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ते तक नहीं हैं। हेल्थवर्कर के प्रयासों का ही परिणाम है कि हम अपने लक्ष्यों को पूरा कर रहे है।

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