: अब भारत में प्रवेश के लिए नेपाली चार पहिए वाहनों को दूतावास से लेनी होगी अनुमति
Thu, Aug 3, 2023
पास मिलने पर ही भारत या भारत के अन्य शहरों में कर सकेंगे प्रवेश
रूपईडीहा, बहराइच। भारत से नेपाल में कहीं जाना होता है तो स्थानीय क्षेत्र के लिए नेपाली कस्टम से इंट्री तथा दूर जाने के लिए प्रतिदिन के हिसाब से भंसार अर्थात निर्धारित टैक्स देकर जाना होता है। अब भारत ने भी सख्त कदम उठाया है, जिसके कारण मंगलवार को भारत-नेपाल सीमा पर उस वक्त नेपाली चार पहिए वाहन संचालकों के बीच अफरातफरी मच गया। जब नेपाल से आने वाली चार पहिया गाड़ियों को कस्टम के द्वारा अचानक रोका जाने लगा। मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय महावाणिज्य दूतावास के द्वारा एक विभागीय पत्र जारी किया गया है। जिसमें रक्सौल के स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ भारतीय कस्टम को यह निर्देश दिया गया है कि नेपाल से आने वाली चार पहिया गाड़ी को भारत में तब ही अंदर आने को प्रवेश मिलेगा, जब उक्त वाहन के स्वामी के द्वारा महावाणिज्य दूतावास या भारतीय दूतावास काठमांडू से आवश्यक जारी कागजात होंगे। हालांकि पहले से रक्सौल तक आने के लिए नेपाली चार पहिया वाहनो को किसी तरह के पास या कागजात की जरूरत नहीं होती थी। अब ऐसे में जब नया नियम सख्ती के साथ लागू किया गया तो सभी चालकों एवं मालिकों के होश उड़ गए और उनके चेहरे पर परेशानी दिखने लगी। उधर नियम जारी होने के बाद मंगलवार को सैकड़ो गाड़ियों को वापस भेज दिया गया है। हालांकि यह नियम नेपाल से आने वाली दो पहिया वाहनो पर लागू नहीं है। दूतावास से जारी पत्र के अनुसार अब नेपाली चार पहिया वाहनो को रक्सौल तक भी आने के लिए पास लेना होगा, जो कि दूतावास से जारी किया जाएगा। अब तक नियमों में ढील के कारण बड़ी संख्या में नेपाली चार पहिया वाहन रक्सौल समेत मोतीहारी, सिवान, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर और यहां तक पटना और दरभंगा एयरपोर्ट तक भी बिना रोक-टोक के चली जाती थी। जिससे भारत सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता था। इधर इस नियम का नेपाल में विरोध भी शुरू हो गया है। हालांकि यहां के कुछ लोगों का कहना है कि इसमें नेपाल में नियम विरोध करने का कोई मतलब नही निकलता, जब नेपाल में हमारे साथ ऐसा हो सकता है तो उनके साथ भारत में नियम लगाना बुरा कैसे हो सकता है। अगर बॉर्डर खुला है तो दोनो तरफ समान रूप से नियम होने चाहिए।
: बेघर और कच्चे मकान में रह रहे मछुवारों को अब मिलेगा पक्का मकान
Thu, Aug 3, 2023
बहराइच। झोपड़ियों और तंबू में जीवन यापन करने वाले मछुआरों को सरकार ने एक तोहफा दिया है। मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि मछुआ कल्याण कोष के तहत मछुआ समुदाय के लोगों को मुफ्त चिकित्सा और आवास उपलब्ध कराया जाएगा तथा मछुआ समुदाय बाहुल्य गांवों में बारात घर भी बनेंगे। जिलाधिकारी मोनिका रानी एवं श्रीमती कविता मीना मुख्य विकास अधिकारी ने मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रदेश सरकार ने मछुआ सामुदाय के लोगों के लिए नई योजनाएं शुरू की हैं। सहायक निदेशक मत्स्य डा. जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने बताया कि बेघर और कच्चे मकान में रह रहे लोगों को मछुआ आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। आवास का क्षेत्रफल 25 वर्ग मी. होगा, जिसमे रसोईघर के लिए भी स्थान चिन्हित होगा। आवास की इकाई लागत रू. 1.20 लाख होगी। आवास हेतु अनुदान की धनराशि सीधे लाभार्थी के खाते में 03 किश्तों में अन्तरित की जायेगी । प्रथम किश्त सामान्य क्षेत्रों में 40 हजार, द्वितीय किश्त 70 हजार तथा तृतीय किश्त 10 हजार की होगी। प्राप्त आवेदन पत्रों के आधार पर लाभार्थियों का सत्यापन संयुक्त रूप से ग्राम पंचायत अधिकारी, मत्स्य विकास अधिकारी तथा खण्ड विकास अधिकारी द्वारा किया जायेगा। ग्राम पंचायतों द्वारा ग्राम सभा की खुली बैठक में मछुआ आवास हेतु लाभार्थियों के चयन के लिए प्रस्ताव पारित कराकर खण्ड विकास अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित करने के उपरान्त संस्तुति सहित पात्र लाभार्थियों की सूची जनपदीय मत्स्य अधिकारी को प्रेषित किया जायेगा। खण्ड विकास अधिकारी पात्रता की जांच करते हुए इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि आवेदक प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना अथवा अन्य किसी आवासीय योजना से आच्छादित नहीं है, आवासहीन है तथा मछुआ आवास चयन के लिए पात्र है। तत्पश्चात जिला स्तरीय समिति द्वारा पात्र आवेदनों को डिजिटल लाटरी द्वारा रैण्डमाइज कर क्रम निर्धारित किया जायेगा।
: 10 से 28 अगस्त तक संचालित होगा फाइलेरिया मुक्त अभियान
Thu, Aug 3, 2023
बहराइच। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 से 28 अगस्त तक संचालित होने वाले फाइलेरिया मुक्त अभियान के सफल संचालन के उद्देश्य से बुधवार देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक के दौरान जिलाधिकारी मोनिका रानी द्वारा सभी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि अभियान के अन्तर्गत सभी लक्षित वर्ग को फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए समय से सभी तैयारी पूर्ण कर ली जाय। अभियान से सम्बन्धित विभाग आईसीडीएस, शिक्षा, पंचायती राज, खाद एवं रसद, नगर विकास, अल्पसंख्यक कल्याण आदि विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर ताल-मेल एवं समन्वय के साथ लक्षित शत प्रतिशत व्यक्तियों को फाइलेरिया की दवा खिलाने में हर संभव सहयोग प्रदान करेगें। बैठक के दौरान सीएमओ डॉ एस.के. सिंह ने बताया गया कि प्रदेश के फाइलेरिया प्रभावित 51 जनपदों में जनपद बहराइच भी है। फाइलेरिया एक परिजीवी जन्य संक्रामक बीमारी है जो धागे जैसे कृमियों से होती है। फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फेलता है। संक्रमित मच्छर के काटने से 10 से 15 वर्षो के पश्चात् यह हाथ, पैर, स्तन व अण्डकोश के सूजन (हाईड्रोसील), पेशाब में सफेद रंग का श्राव(काईल्यूरिया) लम्बे समय से सूखी खासी आना (ट्रोपिकल स्नाफिलिया) आदि के रूप में दिखायी देता है। यह फाइलेरिया एक लाईलाज बीमारी है। इस बीमारी से बचाव के लिए फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन ही एक मात्र उपाय है। उन्होंने बताया कि जनपद में 4348546 लोगों को दवा खिलाने के लिए 3479 टीमे बनायी गयी है। अभियान के सुपरविजन के लिए 580 सुपरवाइजर नामित किये गये है। जनपद बहराइच में डीईसी व अल्वेन्डाजाल दवा खिलायी जानी है। अभियान के दौरान 10 अगस्त 28 अगस्त तक टीमे घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। इसके अलावा बूथ की भी व्यवस्था की गयी है। 02 वर्ष से कम आयु के बच्चों को डीईसी नही दी जायेगी। गर्भवती महिलाओं और गम्भीर रोगो से पीड़ित व्यक्तियों को फाइलेरिया की दवा नहीं खाना है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कविता मीना, सीएमएस डॉ. ओ.पी. चौधरी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी तथा अन्य सम्बन्धित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।