: डीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फखरपुर का किया निरीक्षण
Tue, Jun 13, 2023
मरीज़ों की बहुसंख्या को मद्देनज़र रखते हुए काउण्टर की संख्या बढ़ाएं जाने के दिए निर्देश
बहराइच। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फखरपुर का निरीक्षण कर चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, भवन व परिसर की साफ-सफाई, औषधि वितरण काउण्टर, पंजीकरण काउण्टर, इमरजेन्सी वार्ड व सामान्य वार्ड, प्रसव कक्ष, ओपीडी इत्यादि का निरीक्षण कर मरीज़ों व उनके तीमारदारों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। औषधि वितरण काउण्टर के निरीक्षण के दौरान औषधियों की उपलब्ध का जायज़ा लेते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया कि आवश्यकतानुसार दवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ संभावित बाढ़ के दृष्टिगत एन्टीरैबीज़ व एन्टीवेनम डोज़ की उपलब्धता सुनिश्चत करें। मरीज़ों की बहुसंख्या को मद्देनज़र रखते हुए काउण्टर की संख्या बढ़ाएं जाने के निर्देश दिये। डीएम ने निर्देश दिया कि रिकार्ड एवं स्टाक बुक को अद्यतन रखा जाय। पंजीकरण काउण्टर के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अपरान्ह 12ः30 बजे तक 161 मरीज़ों का पंजीकरण किया गया है। डीएम ने निर्देश दिया कि पंजीकरण में क्रमांक का भी अंकन किया जाय। ओ.पी.डी. के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि डॉ. विवेक रंजन द्वारा 15, डॉ. नरेन्द्र सिंह द्वारा 13, डॉ. शशिभूषण यादव द्वारा 28, डॉ. सुनील द्वारा 45, डॉ. श्वेता यादव द्वारा 16, डॉ. संतोष कुमार द्वारा 27 मरीज़ों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। इमरजेन्सी कक्ष के निरीक्षण के दौरान समुचित साफ-सफाई न पाये जाने पर नियमित रूप से बेड शीट को बदलने तथा समस्त रिकार्ड को साफ-सुथरे ढंग से दर्ज करने के निर्देश दिये गये। डीएम ने यहां पर भर्ती 02 मरीेज़ों से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी भी प्राप्त की। पैथालोजी के निरीक्षण के दौरान लैब टेक्निशियन शमशाद अहमद व पीयूष उपस्थित पाये गये। डीएम द्वारा जांच रिपोर्ट सम्बन्ध में जानकारी करने पर बताया गया कि पैथालोजी के माध्यम से 02 से 03 घण्टे में रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाती है। यहां पर अभिलेखों के अवलोकन में कोई प्रतिकूल तथ्य प्रकाश में नहीं आया। वार्डों के निरीक्षण के मरीज़ भर्ती पाये गये। अल्बत्ता बेड शीट व साफ-सफाई में कुछ कमी पायी गयी। डीएम ने निर्देश दिया कि मानक के अनुसार बेड शीट को बदला जाए तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। बीपीएमयू कक्ष के निरीक्षण के दौरान डीएम ने विगत 05 वर्षों के वित्तीय रिकार्ड की जांच कराये जाने के निर्देश दिये। कोल्डचेन व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान 02 आई.एल.आर. व 02 डीप फ्रीज़र क्रियाशील अवस्था में पाये गये। प्रसव कक्ष के निरीक्षण के दौरान डीएम ने भर्ती महिलाओं एवं उनकेे तीमारदारों से वार्ता कर उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सकीय सेवाओं के बारे में फीड बैक प्राप्त करते हुए निर्देश दिया कि भर्ती मरीज़ों को मानक के अनुसार भोजन एव ंनाश्ता उपलब्ध कराया जाय तथा निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार मरीज़ों को मरीज़ों को चिकित्सालय में रोका जाय। निरीक्षण के दौरान डीएम ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एस.के. सिंह को निर्देश दिया कि सभी सीएचसी के गेट, ओ.पी.डी. कक्षों सहित महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जाएं तथा सीसीटीवी कैम्रों का लिंक जिला मुख्यालय पर रखें ताकि वहां से सीएचसी की गतिविधियों की मॉनीटरिंग की जा सके। सीएचसी के बाहर संचालित पैथालोजी व अल्ट्रासाउण्ड सेन्टरों पर निगरानी रखी जाय। चिकित्सा को पाबन्द करें कि किसी मरीज़ को बाहर की दवा न लिखे और न ही प्राईवेट प्रेक्टिस करें। एम्बुलेन्स में इन्वेन्टरी लगवायें। अधीक्षक डॉ. नरेन्द्र कुमार सिंह को निर्देश दिया गया कि चिकित्सालय भवन, परिसर, प्रसाधन, वार्ड, ओपीडी इत्यादि को साफ सुथरा रखा जाय।
: महिलाओ पर हो रहे अपराध के प्रति उन्हें किया गया जागरूक
Tue, Jun 13, 2023
चौपाल लगाकर महिलाओं व बच्चियों को किया गया जागरूक
बहराइच। चल रहे अभियान मिशन शक्ति के तहत एंटी रोमियो टीम द्वारा जनपद मे एंटीरोमियो के तहत उच्चाधिकारियो द्वारा दिए गए आदेशों, निर्देशो के क्रम मे महिलाओं से बातचीत कर उनकी समस्यायो को मद्देनजर रखते हुए महिलाओ पर हो रहे अपराध के प्रति उन्हें जागरूक किया गया। महिला संबंधित घटित अपराध की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1090, 1098, 1076, 112, 181, 108, यूपी कोप व साइबर संबंधित अपराध शिकायत के लिए टोल फ्री नं. 1930 की जानकारी दी गई तथा सरकारी योजनाये (कन्या सुमंगला योजना, मातृ वंदना योजना, बृद्धा पेंशन योजना) महिलाओं से उनकी समस्याओ के बारे में पूछते हुए जानकारी दी गई। वहीं थाना जरवलरोड पर मिशन शक्ति तृतीय के तहत मंगलवार को ग्राम बम्भौरा में ग्राम सचिवालय पर महिला बीट पुलिस अधिकारी के साथ चौपाल लगाकर महिलाओं व बच्चियों से संबंधित समाज में होने वाले अपराध व उनके रोकथाम के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न हेल्पलाइन नंबर को बता कर उन्हें जागरूक किया गया। इस मौके पर प्रभारी निरीक्षक जरवलरोड दद्दन सिंह, अपराध निरीक्षक अतिउल्लाह, आरक्षी विजय कुमार, आरक्षी अंकित पाल, महिला आरक्षी अश्वनी पाठक, महिला आरक्षी रेनू मौजूद रही।
: चहलारी नरेश का बलिदान देश व समाज के लिए प्रेरणाश्रोत
Tue, Jun 13, 2023
वीरता की कहानियां पढ़कर चहलारी नरेश को नमन
165वें बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
शहीद महाराजा बलभद्र सिंह की जीवन गाथा को वर्तमान पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताते हुए पुष्पांजलि अर्पित की
बहराइच/पयागपुर। सेनानी भवन में मंगलवार को चहलारी नरेश बलभद्र सिंह प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद की शहादत दिवस उनके चित्र पर माल्यार्पण कर सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की ओर से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन महामंत्री एवं शहीद महाराजा बलभद्र सिंह के उत्तराधिकारी आदित्य भान सिंह ने किया। संरक्षक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि महसी (बहराइच) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की बात जब छिड़ती है, चहलारी नरेश बलभद्र सिंह की वीरता जेहन में कौंध उठती है। उनकी वीरता का गवाह 13 जून 1858 को बाराबंकी जिले में रेठ नदी के तट पर अंग्रेजों से लड़ा गया निर्णायक युद्ध है। उन्होंने अवध के विद्रोह की अगुआई करते हुए केवल 18 वर्ष की आयु में अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया था। आदित्य भान सिंह ने कहा कि राजा बलभद्र सिंह का जन्म 10 जून सन 1840 को बहराइच के चहलारी राज्य (अब बहराइच जिले के महसी क्षेत्र) में हुआ था। उनके पिता का नाम राजा श्रीपाल सिंह और मां का नाम महारानी पंचरतन देवी था। चहलारी रियासत पर कश्मीर से आए रैकवार राजपूतों का शासन होता था। राजा श्रीपाल साधु प्रवृत्ति के थे और अल्पायु में ही कुंवर बलभद्र का राज्याभिषेक कर राज्य कार्य से विरत हो जाना चाहते थे। लेकिन बलभद्र उन्हें समझा-बुझाकर उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते थे। अंततः बलभद्र सिंह किशोरावस्था में ही चहलारी के राजा बने। बाल्यकाल से ही निडर और पराक्रमी बलभद्र सिंह युद्ध कौशल में भी महारथी थे। उदारता और संवेदनशीलता के कारण ही राज्य की जनता पूरी तरह से शोषण मुक्त होकर सुख शांति से जीवन यापन कर रही थी। सेना में प्रत्येक जाति धर्म के बहादुर युवकों को भर्ती किया गया, जिसका नेतृत्व अमीर खां कर रहे थे। भिखारी रैदास जैसे बहादुर योद्धा भी सेना में ओहदेदार थे। सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रदेश महामंत्री रमेश मिश्रा जो राष्ट्रीय सम्मेलन आसाम राज्य के गोहाटी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं और ट्रेन में सफर करते हुए टेलीफोन पर सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इतिहासकारों के अनुसार, भगवान राम के अनुज भरत के वंशज रैकवार क्षत्रियों का उद्भव स्थल जम्मू कश्मीर के कश्मीर घाटी के रैका गांव माना जाता है। राकादेव रायक रैकवार वंश के प्रथम पुरुष थे। 1414 ई. में रैकवार वंश के डूंडेशाह, प्रताप देव और भैरवानन्द नामक तीन भाई बाराबंकी के राम नगर कस्बे में आए। जहां भर राजा का शासन था। चाचा भैरवानन्द के बाद उनके भतीजे और प्रताप देव के पुत्र शालदेव व बालदेव ने अल्प समय में ही अपनी निष्ठा और ईमानदारी से राज्य को बुलंदी पर पहुंचा दिया। बाद में दोनों बहादुर भाइयों ने राजा की हत्या कर सत्ता हथिया लिया। सन 1450 में बालदेव रामनगर रियासत के राजा हुए तो उन्होंने शालदेव को घाघरा नदी के उस पार बौंडी (बहराइच) रियासत का राजा बना दिया। समाजसेवी अजय शर्मा ने कहा कि ओबरी के महासमर में राजा बलभद्र के वीरगति प्राप्त होते ही का्रन्तिकारी भागने पर विवश हुए और अंग्रेजों की विजय हुई। बेगम हजरत महल उनके पुत्र बिरजिस, राजा सवाई हरिदत्त सिंह, गोंडा नरेश राजा देवी बख्श सिंह, रायबरेली के राणा बेनी माधव सिंह समेत तमाम क्रातिन्कारी नेपाल के दुर्गम पहाड़ियों में स्थित दांग-देवखर चले गए। पूरे अवध पर कब्जा करके अंग्रेजों ने बौंड़ी का किला ध्वस्त करा दिया और चहलारी राज्य को चार भागों में विभाजित कर 52 गांव का जंग बहादुर राणा, 08 गांव थानगांव के भया, तीसरा भाग में 2200 बीघा मुनुवा शिवदान सिंह और शेष चौथा भाग पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के वंशजों को दे दिया। इस मौके पर समाज सेवी पुण्डरीक पाण्डेय, कुंवर शिवेंद्र सिंह, अगम सिंह, अथर्व मिश्र, निकुंज मिश्र ने वीर रस की पंक्तियों के साथ अपने विचार रखे तथा शहीद महाराजा बलभद्र सिंह की जीवन गाथा को वर्तमान पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। वहीं पयागपुर में अट्ठारह वर्षीय आजादी के दीवाने अमर शहीद चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह रैकवार के 165वें बलिदान दिवस पर अखिल भारतीय गौरवशाली क्षत्रिय महासभा फाउंडेशन के प्रदेश महासचिव विनय कुमार सिंह ‘‘गुड्डू ‘‘ कलहंस के संयोजकत्व में आओ बलिदानों से सीखें पर आधारित प्रेरणा, संकल्प गोष्ठी उनके निजि निवास रुकनापुर, नगर पंचायत पयागपुर में नागेन्द्र सिंह कुशवाहा मण्डलीय अध्यक्ष देवीपाटन मंडल के अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं संगठन प्रभारी उत्तर प्रदेश विनय सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए। गोष्ठी की शुरुआत चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र सिंह रैकवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सामूहिक शैल्यूट देकर किया गया। उक्त अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सिंह ने कहा कि चहलारी नरेश महावीर बलभद्र सिंह की शौर्य गाथा सिर्फ भारत में ही नही बल्कि विश्व विख्यात है। चहलारी नरेश का बलिदान देश व समाज के लिए प्रेरणाश्रोत है। उन्होंने वर्तमान सांसद कैसरगंज से महाराजा बलभद्र सिंह रैकवार महाविद्यालय परिसर बनकटा पयागपुर में चहलारी नरेश बलभद्र सिंह रैकवार की मूर्ति लगाने व उनके नाम से उद्यान बनाने की पुरजोर अपील की ताकि क्षेत्रीय शिक्षार्थी व जनमानस उनकी स्मृति दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर सके एवं उनके जीवन दर्शन तथा ब्यक्तित्व व कृतित्व से भावी पीढ़ी में भी राष्ट्रीय सोंच व सामाजिक सोंच विकसित होती रहे। प्रदेश महासचिव विनय कुमार सिंह गुड्डू कलहंस ने कहा कि राजा बलभद्र सिंह रैकवार सिर्फ भारत ही नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व के प्रकाश स्तंभ थे। उनके रण कौशल से ब्रिटिश साम्राज्य के छक्के छूट गए थे! मण्डलीय अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि बहादुरी के मिशाल भारतीय (अवध) सेनापति चहलारी नरेश बलभद्र सिंह रैकवार 13जून 1858 में शहीद हो जाने के बाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने नेपालगंज में शरण ली थी। उन्होंने कहा कि चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह सर कट जाने के बाद भी कई घंटो तक अंग्रेजी सेना से युद्ध करते रहे। यह एक अनोखी तथा आश्चर्यजनक दृश्य था! गोष्ठी को पूर्व प्रधान विपिन शाही, रामचन्द्र सिंह, राज कुमार सिंह एडवोकेट, दुख हरण सिंह, हुकुम सिंह, अमरजीत सिंह सहित कई लोगों ने सम्बंधित किया। इसके अलावा संजय सिंह जनवार, नितिन सिंह, संतोष शर्मा, नवीन पाल, कुलदीप सिंह सहित कई लोग शामिल रहे।
घाघरा के तीर चल कर देख लिख दिए उस वीर ने जो लेख
कैसरगंज, बहराइच। 1857 की क्रांति के अमर बलिदानी चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह का 165 वां बलिदान दिवस किसान पी.जी. कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.सत्यभूषण सिंह के नगर पंचायत कैसरगंज के ग्राम गुथिया स्थित आवास वेणुकुंज में मनाया गया। बलभद्र सिंह के नेतृत्व में 12 और 13 जून अट्ठारह सौ अट्ठावन को नवाबगंज बाराबंकी में रेठ नदी के तट पर अंग्रेजों के विरुद्ध जोरदार मुकाबला हुआ था। इस युद्ध में अवध की सेना का नेतृत्व करते हुए बहराइच जिले के चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह ने अंग्रेजी सेना का मुकाबला करते हुए मात्र अट्ठारह वर्ष और तीन दिन की आयु में वीरगति को प्राप्त हुए थे। आज भी इस तरुण बलिदानी की वीर गाथा यहां के लोगों में जोश भर देती है। इस अवसर पर एक विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व सैनिक विजय कुमार सिंह पदुम ने की। कार्यक्रम के संयोजक सत्यवीर सिंह रहे। डॉ.सत्यभूषण सिंह ने साहित्यकार सत्यव्रत सिंह के प्रबंध-काव्य चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह की यह पंक्तियां सुनायीं,‘घाघरा के तीर चल कर देख लिख दिए उस वीर ने जो लेख, उन्हें पढ़कर हो गए कवि धन्य, वीर थे बलभद्र सिंह अनन्य‘ इस अवसर पर बीजेपी आईटी विभाग के मंडल संयोजक रूपेश कुमार सिंह जीतू, युवा समाजसेवी विवेक कुमार सिंह रैकवार, शिक्षास्थली फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला, अरुण कुमार सिंह सोनू, अरविंद कुमार सिंह रैकवार, मोहित कुमार सिंह चंदन, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अभिषेक सिंह सूरज, विश्वेंद्र प्रताप सिंह गौरव, समर विजय सिंह, पंकज सिंह रैकवार विवेक कुमार सिंह बिक्कू सहित अनेक लोग उपस्थित थे।