होटल के कमरे में मिला शव : मृतक के साथ रुकी महिला हुई फरार
Sat, Nov 15, 2025
बहराइच।
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के चौकी तिकोनी बाग अन्तर्गत निकट बंजारी मोड़ राधा कृष्ण होटल के कमरा नंबर 106 में ग्राम बिसवां जैता बाजार के रहने वाले महीप कुमार सिंह पुत्र ज्ञानू सिंह थाना बौंडी मृत अवस्था में मिले। घटना की सूचना होटल के स्टाफ ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस होटल में पहुंच कर कार्रवाई शुरू कर दी। बताया गया कि मृतक बहुत ही नशे की हालत में था और साथ में एक औरत व बच्चा भी मृतक के साथ था। महिला बच्चे सहित सुबह सुबह 5 बजे होटल से चली गई थी। जब सुबह 11 बजे स्टाफ द्वारा चेक आउट के समय कमरे पर पहुंचा तो कमरा खुला हुआ था और अंदर 106 नंबर कमरे पर रुकने वाले महीप कुमार सिंह बेड पर मृत अवस्था में पड़े मिले। घटनास्थल पर फोरेंसिंक टीम पहुंचकर साक्ष्यो का संकलन किया। मौके पर मृतक के परिजन मौजूद रहे। पुलिस द्वारा शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्यवाही पूर्ण कर पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया है। प्रकरण के समस्त पहलुओं की गहनता से जाँच की जा रही है, प्राप्त तथ्यों के आधार पर विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
पिंजरे में कैद हुआ आदमखोर बाघ : ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
Sat, Nov 15, 2025
बहराइच।
कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग के ककरहा रेंज के धर्मपुर बेझा गांव में पिछले कई दिनों से बाघ का आतंक जारी था। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ था। वन विभाग की कई टीमों को इलाके में तैनात किया गया था। शनिवार सुबह भोर मे वन विभाग ने बाघ को पिंजरे में सफलतापूर्वक कैद कर लिया। बाघ के पिंजरे में फँसते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताया जा रहा है कि यह वही बाघ है जिसने दो लोगों की जान ले ली थी। हमलों के बाद गांव के लोगों में भारी आक्रोश था। लगातार शिकायतों के बाद विभाग ने ऑपरेशन तेज किया था। पिंजरे में कैद बाघ को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है। क्षेत्र में अब सुरक्षा व्यवस्था सामान्य की जा रही है।
जनपद में आज से “नवजात शिशु देखभाल” सप्ताह शुरू : 21 नवंबर तक चलेगा अभियान
Fri, Nov 14, 2025
बहराइच।
जिले में नवजात शिशुओं की मृत्यु, विशेषकर जन्म के पहले सात दिनों में होने वाली नवजात मृत्यु को कम करने के उद्देश्य से 15 से 21 नवंबर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान समय से पूर्व जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही समुदाय को नवजात की सुरक्षित और वैज्ञानिक देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी जाएँगी। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संजय कुमार ने बताया कि प्रदेश में नवजात मृत्यु दर में सुधार दर्ज हुआ है। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2023 के अनुसार, प्रदेश की नवजात मृत्यु दर 26 प्रति 1,000 जीवित जन्म रही, जो वर्ष 2022 में 27 थी। जिले में नवजात मृत्यु दर को घटाने के लिए संस्थान आधारित नवजात देखभाल और समुदाय आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम पूर्व से ही संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा नवजात शिशु की देखभाल अत्यंत संवेदनशील होती है, इसलिए आवश्यक है सभी प्रसव अस्पताल में कराएं जाए और प्रसव के बाद माँ व शिशु को कम से कम 48 घंटे तक चिकित्सालय में ही रुकें। जन्म के तुरंत बाद शिशु को नहलाने के बजाय पोंछकर साफ कपड़े पहनाए और पहले घंटे में माँ का गाढ़ा पीला दूध अवश्य पिलाया जाए। छह महीने तक केवल माँ का दूध दिया जाए और शिशु को आवश्यक सभी टीके अवश्य लगाएं जाए। उन्होंने कहा कि समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले बच्चों के लिए कंगारू मदर केयर विधि एक बेहतर उपाय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवजात को मसाज, घुट्टी, शहद या अन्य घरेलू पदार्थ देना नुकसानदायक है और इनसे पूरी तरह परहेज किया जाए। जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि नवजात शिशु देखभाल सप्ताह, समुदाय को सही जानकारी देने का एक प्रभावी माध्यम होगा। उन्होंने कहा कि जिले में आशा, एएनएम और स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर परिवारों को यह समझाएंगी कि जन्म के तुरंत बाद साफ-सुथरा वातावरण, माँ का पहला दूध, कंगारू मदर केयर और शिशु की नियमित निगरानी, बीमारियों और जोखिमों से बचाव में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा नवजात देखभाल केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि इसमें परिवार और समुदाय की सहभागिता भी आवश्यक रहेगी। जब परिवार जागरूक होंगे, तभी नवजात को सुरक्षित जीवन का मजबूत आधार मिलेगा।